देश के खाद्य सुरक्षा, कृषि विज्ञान और औद्योगिक नवाचार के मोर्चे से आज तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक बड़ी खबर आई है। हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र में पहले 'अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026' (1st International Maize Conference) का भव्य उद्घाटन किया गया है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञों और सरकारी प्रतिनिधियों ने भारत के मक्का उत्पादन को मौजूदा 55 मिलियन टन से बढ़ाकर अगले एक दशक में 75 मिलियन टन करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य का ऐलान किया है।
इस तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर के 30 से अधिक देशों के वैज्ञानिक, बीज निर्माता कंपनी प्रतिनिधि और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (Ethanol Blending), पोल्ट्री उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में मक्के की भारी मांग को देखते हुए इसकी उत्पादकता बढ़ाना देश की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि विकास दोनों के लिए बेहद आवश्यक हो गया है।
कृषि परिप्रेक्ष्य में कम पानी में उगने वाली और विपरीत जलवायु को झेलने में सक्षम मक्के की फसल भारतीय किसानों के लिए धान की फसल का एक सबसे बेहतरीन और लाभदायक विकल्प बन रही है। सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने उच्च उपज देने वाली संकर (Hybrid) किस्मों और कीट-प्रतिरोधी तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुँचाने के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि मक्का उत्पादन में 75 मिलियन टन का लक्ष्य हासिल करने से भारत न केवल पेट्रो-ईंधन में इथेनॉल के उपयोग को 20% तक सुचारू रूप से लागू रख पाएगा, बल्कि एशिया और अफ्रीकी देशों को मक्के का बड़ा निर्यातक बनकर उभरेगा। इससे किसानों की आय में सीधा उछाल देखने को मिलेगा।
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन यह सिद्ध करता है कि भारत अब केवल पारंपरिक खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य की जलवायु-स्मार्ट (Climate-Smart Agriculture) फसलों और जैव-ईंधन अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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