देश की कृषि अर्थव्यवस्था, पूर्वोत्तर-हिमालयी विकास और कृषि अनुसंधान के मोर्चे से आज लद्दाख के ठंडे मरुस्थल (Cold Desert) से एक बहुत बड़ी, गौरवशाली और चौंकाने वाली खबर आई है। लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा चलाए गए एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत लद्दाख की बर्फीली वादियों में लगाई गई केसर की फसल में महज 30 दिनों के भीतर पहली बार रिकॉर्ड फूल आने (Saffron Flowering) में अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है।
सामान्य तौर पर केसर की खेती में फूल आने में कम से कम दो महीने का समय लगता है, लेकिन लद्दाख की विशिष्ट जलवायु, शुष्क हवा और उपजाऊ मिट्टी के कारण केसर की कलियां रिकॉर्ड समय में खिल उठी हैं। दुनिया के सबसे महंगे मसाले माने जाने वाले केसर (Saffron) का अब तक केवल जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और पाम्पोर में ही व्यावसायिक उत्पादन होता था, जिसे जीआई (GI) टैग भी प्राप्त है।
भारतीय सामाजिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य में लद्दाख में केसर की सफल खेती वहां के स्थानीय बौद्ध किसानों और युवाओं के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। पर्यटन के अलावा अब लद्दाख के किसानों के पास एक ऐसी उच्च-मूल्य वाली (High-Value Crop) नकदी फसल आ गई है, जिससे प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये की आमदनी अर्जित की जा सकेगी।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि लद्दाख की ठंडी जलवायु और कवक-रहित (Fungus-free) वातावरण केसर की खेती के लिए कश्मीर से भी अधिक अनुकूल साबित हो सकता है। सरकार अब इस पायलट प्रोजेक्ट को बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक रूप देने के लिए स्थानीय किसानों को सब्सिडी और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना बना रही है।
यह कृषि क्रांति यह साबित करती है कि भारत के दुर्गम और सुदूर सीमावर्ती इलाकों में आधुनिक कृषि तकनीकों का सही इस्तेमाल करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
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