दिल्ली के प्रमुख छात्र और आवासीय इलाके 'सत्य निकेतन' में हाल ही में हुए एक दर्दनाक इमारत हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह से सख्त मोड में आ गया है। इस हादसे पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने क्षेत्र में व्यापक कार्रवाई करते हुए 17 अवैध इमारतों को ढहा दिया है। इसके साथ ही, पुलिस और जांच एजेंसियों ने हादसे की जिम्मेदारी तय करते हुए मामले में 5वीं गिरफ्तारी की है, जिससे यह साफ हो गया है कि लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सत्य निकेतन का इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस के पास होने के कारण हजारों छात्रों और पेइंग गेस्ट (PG) का केंद्र है। यहाँ अधिक से अधिक छात्रों को बसाने और मोटा किराया वसूलने के लालच में मकान मालिकों और बिल्डरों द्वारा सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों को ताक पर रख दिया जाता है। बिना अनुमति के कई मंजिलें बना लेना, कमजोर नींव पर भारी निर्माण करना और घटिया सामग्री का इस्तेमाल करना इस इलाके में आम बात हो गई थी, जिसके नतीजे में यह दुखद हादसा हुआ।
हादसे के तुरंत बाद MCD द्वारा चलाए गए इस पीला पंजा (बुलडोजर) अभियान से अवैध निर्माण करने वाले भू-माफियाओं और लापरवाह मकान मालिकों में हड़कंप मच गया है। MCD का दावा है कि यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है और पूरी दिल्ली में जर्जर व अवैध रूप से बनी इमारतों का सर्वे किया जा रहा है। जिन इमारतों से इंसानी जिंदगी को खतरा है, उनके खिलाफ बिना किसी दबाव के इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
हालाँकि, इस त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कुछ बड़े सवाल भी खड़े होते हैं। सवाल यह है कि जब इन इमारतों में अवैध निर्माण हो रहा था, तब स्थानीय एमसीडी इंस्पेक्टर और संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे? हादसों के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है? केवल 5 गिरफ्तारियां करने और इमारतें गिराने से समस्या का स्थाई हल नहीं निकलेगा जब तक कि उन भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ा ऐक्शन न हो, जिनकी मिलीभगत से यह अवैध ढांचा खड़ा होता है।
इस घटना ने दिल्ली में तेजी से फैल रहे असुरक्षित अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर (शहरी ढांचे) की पोल खोल दी है। जरूरत इस बात की है कि एमसीडी और दिल्ली सरकार मिलकर एक पारदर्शी और सख्त निर्माण नीति लागू करें, जिसमें हर इमारत का नियमित सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य हो। सत्य निकेतन की यह कार्रवाई एक मिसाल बननी चाहिए ताकि भविष्य में किसी मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।