गुजरात के सूरत शहर के सरोली इलाके में स्थित प्रसिद्ध 'श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट' में अलसुबह एक भीषण आग लग गई। बहुमंजिला इमारत की चौथी और पांचवीं मंजिल पर लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। कपड़े का भारी स्टॉक, सिंथेटिक फैब्रिक और गालियारों (Passageways) में जमा किए गए माल के कारण आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। गनीमत यह रही कि हादसा देर रात हुआ, जिससे किसी जान-माल के बड़े नुकसान या लोगों के फंसने की खबर नहीं है।
आग की सूचना मिलते ही सूरत नगर निगम की फायर ब्रिगेड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 20 से अधिक दमकल गाड़ियों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मशीनों को मौके पर तैनात किया। दोहरी ऊंचाई (Double-height) वाली इमारतों और अंदर भरे घने काले धुएं के कारण अग्निशामक कर्मियों को बुझाने के अभियान में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दमकल कर्मियों को ब्रीथिंग एपरेटस (ऑक्सीजन मास्क) पहनकर धुएं से भरी इमारत में उतरना पड़ा, तब जाकर आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू हो सकीं।
यह घटना सूरत के विश्वप्रसिद्ध कपड़ा उद्योग में अग्नि सुरक्षा की गंभीर कमियों को रेखांकित करती है। ज्यादातर कपड़ा बाजारों में व्यापारी ज्यादा लाभ कमाने और जगह बचाने के चक्कर में आपातकालीन निकास रास्तों (Emergency Exits), सीढ़ियों और गालियारों को कपड़ों के बंडलों से पाट देते हैं। ऐसे में जब आग लगती है, तो यह कपड़ा ईंधन की तरह काम करता है और दमकल कर्मियों का अंदर घुसना भी नामुमकिन बना देता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो इस तरह के अग्निकांडों से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है, जो कई बार बीमा दावों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में फंस जाता है। फायर एनओसी (NOC) मिलने के बाद इमारतों में स्प्रिंकलर और फायर अलार्म सिस्टम का नियमित मेंटेनेंस न होना भी एक पुरानी और घातक परिपाटी बन चुका है।
सूरत नगर निगम और दमकल विभाग को अब ऐसे व्यावसायिक बाजारों के खिलाफ केवल नोटिस देने के बजाय 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनानी होगी। जब तक गालियारों से अवैध स्टॉक हटाने और एक्टिव फायर फाइटिंग सिस्टम को अनिवार्य नहीं किया जाएगा, तब तक देश के इस सबसे बड़े टेक्सटाइल हब पर इस तरह का खतरा हमेशा मंडराता रहेगा।