देश के लॉजिस्टिक्स और परिवहन ढांचे को गति देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए देश के 7 प्रमुख रेलवे प्रोजेक्ट्स को 'फोर-ट्रैक' (चार लाइन) में बदलने की मंजूरी दे दी है। इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना और मालगाड़ियों तथा यात्री ट्रेनों की गति में क्रांतिकारी सुधार लाना है।
भारत में लगातार बढ़ रही माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही के कारण मौजूदा रेल नेटवर्क पर क्षमता से ज्यादा दबाव बना हुआ था। कई मुख्य रूट्स पर पटरियों की कमी के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता था या उनकी गति धीमी करनी पड़ती थी। पटरियों को चार लाइन का बनाने से जहां मालगाड़ियों के लिए अलग से सुगम रास्ता साफ होगा, वहीं एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो यह फैसला देश की समग्र आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बेहद मजबूत करेगा। औद्योगिक केंद्रों, कोयला खदानों, बंदरगाहों और कृषि क्षेत्रों को सीधे और चौड़े रेल नेटवर्क से जोड़ने से कच्चे माल और तैयार माल की ढुलाई की लागत में भारी कमी आएगी। इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को जीडीपी के 10% से नीचे लाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, इन सात बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्य से देश में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकारी निवेश से सीमेंट, स्टील और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की कंपनियों को नए ऑर्डर मिलेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था के अन्य सहायक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह निर्णय भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत कदम है। पटरियों के फोर-ट्रैकिंग का काम पूरा होने के बाद देश में वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों का जाल फैलाना और भी आसान हो जाएगा, जिससे आम यात्रियों का सफर ज्यादा तेज और आरामदायक बन सकेगा।