पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थानीय प्रशासन और नागरिक निकायों ने सुरक्षा व नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। शहर में चलाए गए एक व्यापक निरीक्षण अभियान के बाद करीब 919 होटल और गेस्ट हाउस को अस्थायी रूप से बंद करने के कड़े नोटिस जारी किए गए हैं। इस सामूहिक प्रशासनिक एक्शन से शहर के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह संयुक्त अभियान शहर में चल रहे लगभग 3,700 होटलों और गेस्ट हाउसों के सुरक्षा मानकों की जांच के लिए चलाया जा रहा है। अब तक किए गए निरीक्षणों में यह पाया गया कि लगभग एक-चौथाई प्रतिष्ठानों के पास अनिवार्य ट्रेड लाइसेंस, बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट या फायर एनओसी (फायर फाइटिंग सिस्टम) उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा, कई जगहों पर अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों में घोर अनदेखी पाई गई।
कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले महानगर में बिना फायर सेफ्टी और सुरक्षा एनओसी के चल रहे ये गेस्ट हाउस किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे थे। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए वाणिज्यिक इमारतों में हादसों के बाद कोलकाता प्रशासन ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने का फैसला किया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक ये होटल संचालक सभी आवश्यक सुरक्षा सुधार पूरे नहीं कर लेते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस कार्रवाई से होटल व्यवसायियों और उनसे जुड़े कर्मचारियों में भारी चिंता देखी जा रही है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि अचानक इतने बड़े पैमाने पर होटलों को बंद करने के नोटिस से पर्यटन उद्योग को झटका लगेगा और हजारों लोगों की आजीविका पर संकट आ जाएगा। हालांकि, नागरिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस प्रशासनिक कदम का स्वागत किया है और इसे जनसुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है।
कोलकाता में हुई यह कार्रवाई देश के अन्य बड़े शहरों के लिए भी एक मिसाल है। यह कदम यह स्पष्ट संदेश देता है कि व्यापारिक लाभ कमाने की होड़ में नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में नियमित चेकिंग और नियमों के कड़े पालन से ही शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और पारदर्शी हॉस्पिटैलिटी व्यवस्था कायम रखी जा सकती है।