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ट्राई के नए टेलीकॉम निर्देश: केवल कॉलिंग और SMS इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए आएंगे सस्ते प्लान

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने आम मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों को एक बड़ा और राहत देने वाला निर्देश दिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
22 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने आम मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों को एक बड़ा और राहत देने वाला निर्देश दिया है। ट्राई ने रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) जैसी कंपनियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे ऐसे यूजर्स के लिए विशेष और सस्ते रिचार्ज प्लान पेश करें, जो अपने फोन का इस्तेमाल केवल वॉयस कॉलिंग और SMS भेजने के लिए करते हैं और जिन्हें मोबाइल डाटा की कोई आवश्यकता नहीं होती। इस कदम से देश के करोड़ों फीचर फोन यूजर्स और बुजुर्गों को हर महीने होने वाले फालतू खर्च से मुक्ति मिलेगी।

वर्तमान में टेलीकॉम कंपनियों के ज्यादातर प्लान 'कॉम्बो पैक' के रूप में आते हैं, जिनमें अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ रोजाना 1GB, 1.5GB या 2GB डाटा अनिवार्य रूप से शामिल होता है। इसके कारण उन उपभोक्ताओं को भी 200 से 300 रुपये या उससे अधिक का रिचार्ज कराना पड़ता है, जो इंटरनेट का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते। भारत में आज भी एक बड़ी आबादी (विशेषकर ग्रामीण इलाकों में) बेसिक कीपैड या फीचर फोन का उपयोग करती है, जिनके लिए डाटा वाला महंगा रिचार्ज एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।

ट्राई के इस नए नियम के तहत टेलीकॉम कंपनियों को केवल 'Voice and SMS Only' वाउचर बाजार में उतारने होंगे। इन प्लान्स की वैधता 28 दिनों से लेकर 365 दिनों (एक साल) तक की हो सकती है। इसमें यूजर्स को बिना किसी इंटरनेट डाटा के बेहद कम कीमत पर अनलिमिटेड या टॉकटाइम-आधारित कॉलिंग और न्यूनतम SMS की सुविधा मिलेगी। इस कदम से न केवल सामान्य उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि उन लोगों को भी फायदा होगा जो अपने सेकेंडरी सिम कार्ड को केवल एक्टिव रखना चाहते हैं।

दूरसंचार क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्राई के इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों के औसत राजस्व प्रति यूजर (ARPU) पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इससे ग्राहक आधार को बनाए रखने में मदद मिलेगी। कंपनियों को अब अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की जरूरतों के हिसाब से प्लान कस्टमाइज करने होंगे। इससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) को पाटने में भी मदद मिलेगी, जहां बिना इंटरनेट वाले यूजर्स को अनुचित रूप से अधिक पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे।

जनहित में लिया गया ट्राई का यह फैसला भारत के टेलीकॉम सेक्टर में उपभोक्ता-केंद्रित बदलाव की एक नई मिसाल है। महंगाई के दौर में यह कदम गरीब, ग्रामीण और बुजुर्ग आबादी के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत बनकर आया है। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा नए वॉयस-ओनली प्लान्स की घोषणा जल्द ही किए जाने की संभावना है, जिससे करोड़ों मोबाइल फोन यूजर्स को अपनी जरूरत के हिसाब से सही और किफायती प्लान चुनने की आजादी मिलेगी।