उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में हुई प्रसिद्ध व्यापारी की रहस्यमयी हत्या के मामले का खुलासा करते हुए जब पुलिस ने पर्दा उठाया, तो हर कोई सन्न रह गया। घर के अंदर हुई इस हत्या के पीछे कोई बाहरी लुटेरा या पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि व्यापारी का अपना ही बेटा निकला। संपत्ति के लालच और व्यक्तिगत विवादों के चलते बेटे ने ही भाड़े के कातिलों के साथ मिलकर अपने पिता की बेरहमी से हत्या की साजिश रची थी।
कानपुर पुलिस के अनुसार, शुरुआत में इस मामले को लूट के बाद हत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी। व्यापारी का शव उनके कमरे में मिला था और अलमारियाँ खुली पड़ी थीं। लेकिन क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम ने जब घटनास्थल का मुआयना किया, तो उन्हें कई तकनीकी खामियाँ नजर आईं—जैसे घर में जबरन घुसने (Forced Entry) के कोई निशान नहीं थे और सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर (DVR) गायब थी। इन सुरागों ने पुलिस का ध्यान घर के ही सदस्यों की ओर मोड़ा।
जब पुलिस ने व्यापारी के बेटे से कड़ाई से पूछताछ की और उसके मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) की लोकेशन खंगाली, तो उसकी पूरी मनगढ़ंत कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। बेटे ने कबूल किया कि पिता उसकी फालतू खर्ची और गलत आदतों से परेशान होकर उसे जायदाद से बेदखल करने की योजना बना रहे थे। इसी खौफ और पूरी संपत्ति पर रातों-रात कब्जा करने की नीयत से उसने सुपारी देकर अपने पिता की हत्या करवा दी।
कानपुर की इस वारदात ने एक बार फिर समाज में पैसे के लिए खत्म हो रहे रिश्तों और नैतिक मूल्यों के पतन की भयावह तस्वीर पेश की है। जिस बेटे को पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से पाला-पोसा और बड़ा किया, वही बेटा संपत्ति के टुकड़े के लिए पिता का हत्यारा बन गया। व्यापारिक समुदाय में इस घटना से गहरा शोक और आक्रोश फैला हुआ है।
पुलिस ने आरोपी बेटे और हत्या में शामिल उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर आला-ए-कत्ल और गायब की गई डीवीआर बरामद कर ली है। पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस मामले में ऐसा मजबूत केस तैयार किया जाएगा ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। यह घटना आधुनिक समाज में भौतिकवाद के हावी होने और पारिवारिक रिश्तों के बिखरने की एक दुखद नजीर बन गई है।