राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने एक ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्रीय ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देश के 14 राज्यों में एक साथ 100 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस विशाल ऑपरेशन में 'डार्क वेब' (Dark Web) के जरिए संचालित होने वाले एक बेहद खतरनाक और अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो विदेशी धरती से भारत के भीतर टेरर-फंडिंग, अवैध हथियार सप्लाई, डिजिटल ड्रग रैकेट और खालिस्तानी व पूर्वोत्तर के उग्रवादी गुटों को आर्थिक मदद पहुंचा रहा था। इस छापेमारी ने देश के भीतर छिपे देश विरोधी तत्वों के होश उड़ा दिए हैं।
इस अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब सुरक्षा एजेंसियों को क्रिप्टो-करंसी (Cryptocurrency) के संदिग्ध ट्रांजेक्शन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए विदेशी हैंडलर्स के साथ हो रही चैट का सुराग मिला। जांच में पाया गया कि कनाडा, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में बैठे भारत-विरोधी तत्वों के आका डार्क वेब के गुप्त सर्वर्स का इस्तेमाल करके भारत में युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे थे और उन्हें आपराधिक व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए मोटी रकम भेज रहे थे। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये का कैश, क्रिप्टो-वॉलेट्स के सीक्रेट कोड्स, अवैध आधुनिक हथियार और कई जाली दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
इस देशव्यापी कार्रवाई के बाद विदेशी धरती पर बैठकर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले भगोड़े अपराधियों और उग्रवादी सरगनाओं के नेटवर्क पर सबसे बड़ा सीधा प्रहार हुआ है। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस सिंडिकेट के तार विदेशी बैंकों और शेल कंपनियों से जुड़े पाए हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के भीतर लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) और धार्मिक वैमनस्य फैलाने के लिए फंडिंग करने में किया जा रहा था। इस सफल ऑपरेशन ने भारत विरोधी तत्वों के उस पूरे 'फाइनेंशियल इकोसिस्टम' को ध्वस्त कर दिया है जिसके दम पर वे कूद रहे थे।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में, यह सफलता भारत की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। भारत लंबे समय से 'क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म' और 'हाइब्रिड थ्रेट्स' का सामना करता रहा है। लेकिन अब, तकनीक के इस आधुनिक दौर में दुश्मन देश भारत के युवाओं को भड़काने के लिए साइबर स्पेस और डार्क वेब का सहारा ले रहे हैं। भारतीय जांच एजेंसियों की यह त्वरित और समन्वित कार्रवाई यह दर्शाती है कि भारत का आंतरिक सुरक्षा ढांचा अब डिजिटल दुनिया के अदृश्य अपराधियों को भी ढूंढ निकालने में सक्षम है।
गृह मंत्रालय ने इस सफलता के बाद पूरे देश में क्रिप्टो-करंसी के अवैध लेन-देन और डार्क वेब गतिविधियों की निगरानी के लिए एक नई विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, भारत सरकार विदेश में छिपे उन भगोड़ों के खिलाफ इंटरपोल (Interpol) के जरिए 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करवाने और उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया को तेज कर रही है जो विदेशी सरजमीं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर, इस निर्णायक कार्रवाई ने पूरे देश में यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत की शांति, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह देश के भीतर छिपा हो या सात समुद्र पार डार्क वेब की गहराइयों में। भारत का यह कड़ा कानून-व्यवस्था ढांचा देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत और अभेद्य बनाता है।
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