उत्तर पूर्व एशिया में भू-राजनीतिक तनाव को और हवा देते हुए उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन ने एक बड़ा बयान जारी किया है। रूसी राष्ट्रपति के जन्मदिन के अवसर पर भेजे गए आधिकारिक पत्र में किम जोंग उन ने मास्को को अपना "अपरिवर्तनीय और अटूट समर्थन" देने का खुला ऐलान किया है। इसके साथ ही खुफिया उपग्रह तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि उत्तर कोरिया ने अपने मुख्य परमाणु परीक्षण परिसर में नई भूमिगत सुरंगों का निर्माण पूरा कर लिया है और वहां नई सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती की जा रही है।
इस रणनीतिक समझौते ने वाशिंगटन, टोक्यो और सियोल के रक्षा गलियारों में खतरे की घंटी बजा दी है। उत्तर कोरिया रूस को लगातार तोप के गोले, रॉकेट और सैन्य तकनीक की आपूर्ति कर रहा है, और बदले में उसे रूस से उन्नत उपग्रह तकनीक और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का ज्ञान मिल रहा है। इस 'लेन-देन' की कूटनीति ने संयुक्त राष्ट्र संघ के उन सभी प्रतिबंधों को बेअसर कर दिया है जो वर्षों से उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए लगाए गए थे।
दक्षिण कोरिया और जापान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपनी संयुक्त नौसैनिक सतर्कता को उच्चतम स्तर पर कर दिया है। अमेरिकी प्रशांत कमान ने चेतावनी दी है कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच यह नया सैन्य गठजोड़ न केवल यूरोप के युद्ध को लंबा खींच रहा है, बल्कि यह पूरे पूर्व एशिया में एक नए परमाणु शक्ति संतुलन को जन्म दे रहा है।
भारतीय दृष्टिकोण से उत्तर कोरिया का यह आक्रामक रुख और परमाणु हथियारों का प्रसार एक सीधा रणनीतिक खतरा है। इतिहास गवाह है कि उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का सीधा संबंध पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से रहा है। उत्तर कोरिया द्वारा विकसित की जाने वाली किसी भी नई मिसाइल तकनीक का परोक्ष हस्तांतरण भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों के गैर-प्रसार (Non-proliferation) का समर्थक रहा है। पूर्व एशिया में बढ़ते इस सैन्य तनाव से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा बाधित होती है, जहां से भारत का बड़ा व्यापार गुजरता है। भारत को क्वाड (QUAD) साझेदारों के साथ मिलकर इस अवैध हथियार हस्तांतरण और क्षेत्रीय अस्थिरता के खिलाफ अपनी कूटनीतिक आवाज उठानी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रतिबंधों का दौर अब अप्रभावी साबित हो रहा है। भारत को अपनी 'ट्रैड-ऑफ' कूटनीति को मजबूत करते हुए अपनी राष्ट्रीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों (जैसे S-400 और स्वदेशी बॉलस्टिक मिसाइल डिफेंस) की तैनाती को और तेज करना होगा ताकि किसी भी क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन के बिगड़ने का असर भारत की सुरक्षा पर न पड़े।
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