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यमन का बारूद: लाल सागर में बढ़ा खतरा

मिडिल ईस्ट में संघर्ष का दायरा अब और अधिक खतरनाक रुख अपना चुका है। यमन में हूती विद्रोहियों ने सरकारी सुरक्षा बलों को खदेड़ते हुए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर ताइज़ (Taiz) की ओर अपनी आक्रामक बढ़त तेज कर दी है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
05 Oct 2026
Solar farm during sunset

मिडिल ईस्ट में संघर्ष का दायरा अब और अधिक खतरनाक रुख अपना चुका है। यमन में हूती विद्रोहियों ने सरकारी सुरक्षा बलों को खदेड़ते हुए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर ताइज़ (Taiz) की ओर अपनी आक्रामक बढ़त तेज कर दी है और अल-तुरबा (Turbah) कस्बे पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इसके जवाब में बड़े सैन्य अभियान की घोषणा कर दी है, जिससे इस क्षेत्र में भयावह युद्ध छिड़ गया है।  

विदेशी समाचार एजेंसियों के अनुसार, हूतियों की यह नई सैन्य बढ़त बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य और लाल सागर के समुद्री व्यापारिक मार्गों को एक बार फिर सीधे खतरे में डाल रही है। लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा अब दोगुना हो गया है। पश्चिमी नौसैनिक जहाजों की तैनाती के बावजूद विद्रोहियों का दुस्साहस कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

हूतियों की इस नई घेराबंदी ने स्वेज नहर के रास्ते होने वाले वैश्विक व्यापार की रीढ़ तोड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से घुमाकर भेजना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) और डिलीवरी का समय दोनों काफी बढ़ गए हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई से जूझ रही है और इस नए घटनाक्रम ने आग में घी का काम किया है।

भारतीय परिपेक्ष्य में, लाल सागर का यह संकट सीधे तौर पर भारतीय निर्यातकों और ऊर्जा आयात से जुड़ा हुआ है। भारत का यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला व्यापार इसी समुद्री मार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर है। भाड़ा बढ़ने से भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और एग्रो-एक्सपोर्ट को तगड़ा झटका लग रहा है।

भारतीय नौसेना ने लाल सागर और अदन की खाड़ी में अपने अग्रिम मोर्चे के युद्धपोतों और मार्कोस (MARCOS) कमांडोज की गश्त बढ़ा दी है। भारतीय जहाजों को सुरक्षा देने और समुद्री डकैती तथा हूती हमलों से बचाने के लिए भारतीय नौसेना वहां रक्षक की भूमिका निभा रही है। भारत किसी भी कीमत पर अपनी मरीन ट्रेड सप्लाई चेन को बाधित नहीं होने देना चाहता।

विदेश मंत्रालय के स्तर पर भी भारत मध्य पूर्व के प्रमुख साझेदारों—सऊदी अरब, यूएई और ओमान—के साथ संपर्क में है ताकि लाल सागर में जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत की यह त्वरित नौसैनिक कार्रवाई साबित करती है कि हिंद महासागर से लेकर लाल सागर तक भारत अब एक अनिवार्य 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' बन चुका है।

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