पर्सियन गल्फ और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाली दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री घाटी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में सैन्य टकराव की स्थिति अचानक गहरा गई है। ईरान के तटीय इलाकों से नौसैनिक अभ्यास के दौरान नए मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण किए जाने के बाद अमेरिका ने अपने पांचवें नौसैनिक बेड़े (5th Fleet) को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा का हवाला देते हुए जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर गश्त बढ़ा दी है, जिससे तेहरान और वाशिंगटन के बीच सीधा टकराव सामने आ गया है।
इस इलाके में अचानक बढ़ी सैन्य हलचल का असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर रातों-रात देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आ गया है और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रास्ते पर कुछ दिनों के लिए भी वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही ठप हुई, तो पूरे विश्व में 1970 के दशक जैसा भीषण ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
भारत के लिए यह खबर सीधे तौर पर आर्थिक चिंताओं को बढ़ाने वाली है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। तेल की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ा देती है, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रयासों पर इस वैश्विक तेल झटके का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो देश में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिसका सीधा असर आम नागरिक की जेब पर पड़ेगा और खाद्य वस्तुओं तथा दैनिक उपभोग की वस्तुओं में महंगाई बढ़ सकती है।
कूटनीतिक मोर्चे पर, नई दिल्ली के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है। भारत के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ ही खाड़ी के अरब देशों (यूएई, सऊदी अरब) के साथ भी अत्यंत घनिष्ठ रणनीतिक संबंध हैं। भारत इस क्षेत्र में शांति का मुखर समर्थक रहा है क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय नागरिक निवास करते हैं। किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में इन भारतीयों की सुरक्षा और उनकी स्वदेश वापसी भारत सरकार के लिए एक विशाल लॉजिस्टिक चुनौती बन जाएगी।
भारत अब अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को मजबूत करने और खाड़ी से इतर अन्य देशों से तेल आपूर्ति के विकल्प तलाशने पर तेजी से विचार कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस संकट के बीच दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की लगातार अपील कर रहा है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
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