लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में यमन के हुथी विद्रोहियों ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों (Cargo Ships) को निशाना बनाकर पूरे वैश्विक व्यापार में तहलका मचा दिया है। हालिया घटना में, एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के विशालकाय कंटेनर जहाज पर ड्रोन और एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों से सीधा हमला किया गया, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई। हुथी विद्रोहियों ने दावा किया है कि वे इजराइल और उसके सहयोगी देशों से जुड़े जहाजों को तब तक निशाना बनाते रहेंगे, जब तक गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकती।
इस ताजा हमले के बाद दुनिया की शीर्ष शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर के रास्ते अपने जहाजों की आवाजाही को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जहाजों को अब स्वेज नहर के छोटे और सुरक्षित रास्ते के बजाय पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते से यूरोप और अमेरिका जाना पड़ रहा है। इस नए लंबे मार्ग के कारण जहाजों की यात्रा का समय 10 से 15 दिन बढ़ गया है, जिससे शिपिंग फ्रेट (भाड़ा) में 300 प्रतिशत तक का उछाल आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हाहाकार मचा हुआ है।
अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेनाओं ने 'ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन' के तहत यमन में हुथी ठिकानों पर फिर से जवाबी एयरस्ट्राइक की है, लेकिन इसके बावजूद हुथी हमलों की तीव्रता में कोई कमी नहीं आई है। यमन के दुर्गम इलाकों और ईरान से मिल रहे अत्याधुनिक हथियारों के बल पर हुथी विद्रोही अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन को खुली चुनौती दे रहे हैं। पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाई के बावजूद लाल सागर जैसा अति-संवेदनशील समुद्री मार्ग इस समय एक पूर्ण युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो चुका है।
भारत के लिए यह संकट बेहद गंभीर और चिंताजनक है, क्योंकि भारत का यूरोप, उत्तर अमेरिका और अफ्रीका के साथ होने वाला अधिकांश व्यापार इसी लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते से गुजरता है। जहाजों का भाड़ा बढ़ने और बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में बेतहाशा वृद्धि होने से भारतीय निर्यातकों (Exporters) की लागत बहुत बढ़ गई है। भारतीय सामान जैसे वस्त्र, चाय, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पाद विदेशी बाजारों में महंगे हो रहे हैं, जिससे भारत के निर्यात और व्यापार संतुलन पर सीधा विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
इस संकट से निपटने के लिए भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपनी युद्धपोत तैनाती अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दी है। भारतीय नौसेना के विध्वंसक युद्धपोत (Guided Missile Destroyers) न केवल भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हुथी हमलों और समुद्री डाकुओं (Pirates) के दौर में त्वरित सहायता पहुँचा रहे हैं। भारतीय नौसेना की इस मुस्तैदी और मानवीय सहायता की वैश्विक स्तर पर जमकर तारीफ हो रही है और भारत एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के रूप में उभरा है।
अंततः, लाल सागर का समुद्री संकट यह दर्शाता है कि कैसे एक क्षेत्रीय उग्रवादी संगठन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और अर्थव्यवस्था को पंगु बना सकता है। जब तक मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित नहीं होती, तब तक लाल सागर का यह मार्ग असुरक्षित ही रहेगा। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करते हुए वैकल्पिक व्यापार मार्गों की खोज तेज करनी होगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार के समुद्री संकटों से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
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