भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से ठीक सटे पड़ोसी देश म्यांमार में गृहयुद्ध ने अब तक का सबसे भयानक और रक्तरंजित रूप ले लिया है। विद्रोही संगठन 'अराकान आर्मी' (Arakan Army) ने म्यांमार की जुंटा (सैन्य सरकार) की सेना को खदेड़ते हुए भारत और बांग्लादेश से लगती सीमा के बड़े भू-भाग पर अपना कब्जा जमा लिया है। बांग्लादेशी सीमा और भारतीय राज्यों—विशेषकर मिजोरम—के करीब मिसाइल और मोर्टार हमलों की गूँज सुनाई दे रही है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में भयानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
म्यांमार सेना की लगातार होती हार के कारण म्यांमार के सैकड़ों सैनिक अपनी जान बचाने के लिए भारतीय सीमा में शरण ले रहे हैं। इसके साथ ही हजारों की संख्या में शरणार्थी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। अराकान आर्मी की इस तेजी से होती बढ़त ने म्यांमार के सैन्य शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। चीन निर्मित हथियारों और अत्याधुनिक ड्रोन तकनीकों से लैस यह विद्रोही गुट अब म्यांमार के सबसे महत्वपूर्ण तटीय शहरों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित करने के करीब पहुंच चुका है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि म्यांमार का यह बिखराव पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक दुःस्वप्न बन गया है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने से यह क्षेत्र अब अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स सिंडिकेट और साइबर क्राइम हब का केंद्र बनता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय म्यांमार की सैन्य सरकार पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन चीन और कुछ अन्य देशों के पर्दे के पीछे से मिल रहे समर्थन के कारण यह गृहयुद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य से म्यांमार की यह स्थिति भारत की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर चुनौती है। भारत की महत्वाकांक्षी 'कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट' (Kaladan Project), जो भारत के कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है, पूरी तरह से इस युद्ध की चपेट में आ गई है। अराकान आर्मी का इस पूरे रूट पर कब्जा होने के कारण भारत का करोड़ों डॉलर का ड्रीम प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है।
सुरक्षा के लिहाज से भारतीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने असम राइफल्स और भारतीय सेना को भारत-म्यांमार सीमा पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने और चौकसी बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं। पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों को म्यांमार की इस अस्थिरता का फायदा उठाकर फिर से सिर उठाने से रोकना भारत की प्राथमिक चुनौती है। भारत सरकार एक तरफ शरणार्थियों के संकट को मानवीय आधार पर संभाल रही है, तो दूसरी तरफ अपनी सीमाओं को पूरी तरह सील करने की कार्रवाई में जुटी है।
म्यांमार का यह संकट भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक इम्तिहान भी है। भारत को अपनी सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए म्यांमार की जुंटा सरकार और जमीनी स्तर पर कब्जा जमाए बैठी अराकान आर्मी दोनों के बीच एक बेहद नाजुक संतुलन बनाकर चलना पड़ रहा है। यदि म्यांमार में शांति की बहाली जल्द नहीं होती, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का विकास और सुरक्षा ढांचा लंबे समय के लिए प्रभावित हो सकता है।
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