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इराकी वायुक्षेत्र का नाकाबंदी खेल: तेहरान-बगदाद में महातनाव!

मध्य पूर्व के रणनीतिक मानचित्र पर संकट गहरा गया है जब इराकी उड्डयन अधिकारियों ने ईरान से आने वाली सभी उड़ानों पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
30 Sep 2026
Solar farm during sunset

मध्य पूर्व के रणनीतिक मानचित्र पर संकट गहरा गया है जब इराकी उड्डयन अधिकारियों ने ईरान से आने वाली सभी उड़ानों पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया है। तेहरान ने इस कदम को सीधे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों का कूटनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए तुरंत बगदाद को कड़ा अल्टीमेटम थमा दिया है। ईरान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि उनके उड़ानों के लिए इराकी हवाई क्षेत्र को तुरंत नहीं खोला गया, तो वे उन सभी क्षेत्रीय हवाई अड्डों की उड़ानों को पंगु बना देंगे जो तेहरान के विमानों को उतरने से रोक रहे हैं।

बगदाद में इराकी प्रधानमंत्री पर अमेरिकी दबाव और तेहरान समर्थित गुटों के बीच दोहरी तलवार लटकी हुई है। इराकी सशस्त्र गुटों ने बगदाद सरकार को चेतावनी दी है कि यदि ईरान के खिलाफ यह नाकाबंदी वापस नहीं ली गई तो वे सरकार को गिराने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस पूरे गतिरोध के बीच तुर्की की प्रमुख एयरलाइंस और पेगासस ने भी ईरान के लिए अपनी तमाम व्यावसायिक उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे ईरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।  

इराकी वायुक्षेत्र के बंद होने से पश्चिमी एशिया का हवाई संपर्क लगभग ठप हो चुका है। मध्य पूर्व के देशों में युद्ध जैसी स्थिति के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला और वाणिज्यिक उड़ानों के मार्ग पूरी तरह परिवर्तित कर दिए गए हैं। अमेरिका ने ईरान की हथियार खरीद से जुड़े 13 नए संस्थाओं पर सख्त प्रतिबंध ठोक दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव की ज्वाला बुझने की बजाय और भड़क उठी है।  

भारत के लिए यह कूटनीतिक उथल-पुथल दोहरा झटका है। खाड़ी देशों और ईरान के बीच स्थित भारतीयों की सुरक्षा और विशाल डायस्पोरा की यात्रा व्यवस्था इस नाकाबंदी के कारण बुरी तरह बाधित हो रही है। भारत का 'उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा' (INSTC), जो ईरान के रास्ते रूस और यूरोप तक पहुंच बनाता है, इस तरह के क्षेत्रीय तनाव से पूरी तरह अनिश्चितता के गर्त में गिरता दिख रहा है।  

भारत के पास मध्य पूर्व में शांति के लिए अपनी कूटनीतिक क्षमता का खुलकर प्रदर्शन करने का समय आ चुका है। भारत के ईरान और इराक दोनों देशों के साथ ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध हैं। यदि भारत इस वायुक्षेत्र विवाद में एक मध्यस्थ के रूप में आगे आता है, तो वह न केवल अपने विशाल नागरिक हितों की रक्षा कर पाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी 'शांतिदूत' की स्थिति को भी मजबूत करेगा।

यह उथल-पुथल साबित करती है कि मध्य पूर्व का हर छोटा-बड़ा गतिरोध वैश्विक यात्रा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। भारत अपनी विमानन कंपनियों के लिए नए सुरक्षित गलियारों की मांग कर रहा है ताकि खाड़ी देशों से संपर्क बना रहे। दुनिया अब यह देखने का इंतजार कर रही है कि क्या बगदाद तेहरान की धमकियों के आगे झुकता है या फिर अमेरिका का यह नाकाबंदी दांव ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करेगा।

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