यमन के हुथी विद्रोहियों ने लाल सागर के सबसे रणनीतिक समुद्री जलडमरूमध्य 'बाब-अल-मंदेब' (Bab el-Mandeb) के पूरे तटीय इलाके पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का सनसनीखेज दावा किया है। विद्रोहियों के इस अचानक आक्रामक सैन्य अभियान के बाद लाल सागर से गुजरने वाले तमाम व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। यमन के तटीय इलाकों में भारी मिसाइल और ड्रोन बैटरियां तैनात कर दी गई हैं, जिससे स्वेज नहर के माध्यम से होने वाला अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अब इतिहास का सबसे बड़ा झटका झेल रहा है।
इस अभूतपूर्व नाकेबंदी के जवाब में सऊदी अरब और मिस्र की ओर से भारी सैन्य गोलबंदी शुरू हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधनों के युद्धपोत इस क्षेत्र में गश्त तो कर रहे हैं, लेकिन हुथियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक आत्मघाती ड्रोनों और एंटी-शिप मिसाइलों ने बहुराष्ट्रीय नौसेना की नाक में दम कर रखा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है, क्योंकि यूरोप जाने वाले मालवाहक जहाजों को अब पूरा अफ्रीका महाद्वीप घूमकर (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे हमले की पटकथा क्षेत्रीय शक्तियों की शह पर लिखी गई है ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह से पंगु बनाया जा सके। लाल सागर की इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल के दामों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही मुद्रास्फीति से जूझ रही थीं, और अब इस नए समुद्री संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमर तोड़कर रख दी है, जिससे आने वाले दिनों में और भारी मंदी के बादल मंडराने लगे हैं।
भारत के परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो लाल सागर में संकट सीधे तौर पर भारतीय आयात-निर्यात को प्रभावित कर रहा है। भारत का यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला बहुमूल्य समुद्री व्यापार इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। जहाजों के लंबे रास्तों से जाने के कारण भारतीय निर्यातकों की शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में महंगे हो रहे हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल के जहाजों की सुरक्षा भी भारत सरकार के लिए अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
इस संकट से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपने सबसे एडवांस गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और पी-8आई सर्विलांस विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। भारतीय नौसेना न केवल भारतीय ध्वज वाले जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को भी हुथी ड्रोनों के हमलों से सुरक्षा प्रदान कर रही है। भारत की यह 'नेट-सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में बेहद सराही जा रही है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की साख और मजबूत हुई है।
निष्कर्ष यह है कि जब तक लाल सागर में समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका काला साया मंडराता रहेगा। भारत को अब अपनी वैकल्पिक व्यापारिक योजनाओं जैसे 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को तेजी से धरातल पर उतारने की दिशा में काम करना होगा। यह समुद्री संकट भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीतियों और नौसैनिक बेड़े के आधुनिकीकरण को और अधिक आक्रामक बनाने का स्पष्ट संदेश दे रहा है।
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