अदन की खाड़ी और लाल सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित छोटे से देश जिबूती में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। ताजा खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने जिबूती स्थित अपने लॉजिस्टिक बेस को एक पूर्ण सैन्य कॉम्प्लेक्स में बदल दिया है, जहाँ अब चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु संचालित पनडुब्बियां तैनात की जा रही हैं। इस कदम से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक समुद्री व्यापार पर चीन की सीधी नजर और पकड़ मजबूत हो गई है।
इस रणनीतिक क्षेत्र में चीनी नौसेना का बढ़ता जमावड़ा अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अमेरिकी सेना का अफ्रीकी कमान (AFRICOM) जिबूती में चीनी बेस से मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच रेडार लैज़िंग और हवाई क्षेत्र के उल्लंघन को लेकर कई बार तनातनी हो चुकी है। पश्चिमी नौसेनाओं को अंदेशा है कि चीन किसी भी भावी वैश्विक संकट की स्थिति में इस मुख्य समुद्री व्यापारिक गलियारे को बंद करने की क्षमता हासिल कर रहा है।
जिबूती का यह जलडमरूमध्य दुनिया का ऐसा संकरा समुद्री मार्ग है, जहाँ से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल और अरबों डॉलर का व्यापार गुजरता है। इस इलाके में चीन की पकड़ मजबूत होने का मतलब है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की चाबी अपने पास रखना चाहता है। इसके अलावा, चीन हिंद महासागर के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, पाकिस्तान के ग्वादर और म्यांमार में अपने 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) नेटवर्क को जिबूती बेस से जोड़कर हिंद महासागर में पूर्ण वर्चस्व हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
भारतीय परिपेक्ष्य में, यह खबर भारतीय नौसेना और देश के रक्षा रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने वाली है। हिंद महासागर भारत का प्राकृतिक प्रभाव क्षेत्र रहा है। जिबूती में चीन की परमाणु पनडुब्बियों की स्थायी मौजूदगी से भारत के पश्चिमी समुद्री सीमा और अरब सागर में चीनी घुसपैठ का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। यह भारत के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर एक सीधा आघात है।
भारतीय नौसेना ने इस चीनी घेराबंदी का मुकाबला करने के लिए अपनी 'मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट' (Mission-Based Deployment) रणनीति को तेज कर दिया है। भारत ने ओमान के दुक्म (Duqm) बंदरगाह, मॉरीशस के अगालेगा द्वीप और सेशेल्स में अपनी नौसैनिक पहुंच और बुनियादी ढांचे को बेहद मजबूत बना लिया है। इसके साथ ही, भारत फ्रांस और अमेरिका के साथ लॉजिस्टिक समझौतों (LEMOA) के जरिए हिंद महासागर में हर चीनी हलचल की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है, ताकि समुद्री संतुलन भारत के पक्ष में बना रहे।
संक्षेप में, जिबूती में चीनी नौसेना का यह नया विस्तार समुद्री सुरक्षा के पूरे ताने-बाने को बदल रहा है। हिंद महासागर अब शांति का क्षेत्र न रहकर महाशक्तियों के नौसैनिक शक्ति प्रदर्शन का मुख्य अखाड़ा बन गया है। भारत को अपनी नौसैनिक क्षमताओं, विशेष रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध तकनीक और विमान वाहक पोतों के बेड़े को और तेजी से आधुनिक बनाना होगा ताकि अपनी समुद्री सीमाओं की संप्रभुता को हर हाल में सुरक्षित रखा जा सके।
#DjiboutiBase #ChinaNavy #IndianOceanSecurity #StringOfPearls #NavyAlert #IndiaDefense #MaritimeGeopolitics #BabElMandeb