यूरोप के पूर्वी मोर्चे से एक चौंकाने वाली खबर आ रही है, जहाँ यूक्रेन के सबसे करीबी मददगार रहे पोलैंड ने कीव के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को आंशिक रूप से निलंबित करने का संकेत दिया है। पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर पोलिश किसानों और ट्रक ड्राइवरों ने यूक्रेनी कृषि उत्पादों के अत्यधिक आयात के खिलाफ अनिश्चितकालीन नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस तनातनी ने रूस के खिलाफ बने पूरे यूरोपीय और नाटो (NATO) गठबंधन के भीतर गहरी फूट को उजागर कर दिया है।
वारसॉ (पोलैंड सरकार) का कहना है कि यूक्रेन से आ रहे सस्ते अनाज और कृषि उत्पादों के कारण पोलैंड के स्थानीय किसानों की कमर टूट रही है और घरेलू बाजार पूरी तरह तबाह हो रहा है। जवाब में यूक्रेन ने पोलैंड के इस कदम को युद्ध के समय में 'पीठ में छुरा घोंपने' जैसा करार दिया है और यूरोपीय संघ (EU) में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। इस विवाद के कारण यूक्रेन को जाने वाली पश्चिमी सैन्य मदद और मानवीय सहायता की आपूर्ति सीमा पर फंस गई है।
इस अंतर-यूरोपीय खींचतान ने ब्रसेल्स (यूरोपीय संघ मुख्यालय) और वाशिंगटन को अत्यधिक तनाव में डाल दिया है। क्रेमलिन (रूस) इस कूटनीतिक दरार को अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि पोलैंड जैसा मजबूत नाटो सदस्य देश यूक्रेन से अपना समर्थन पीछे खींचता है या रसद रोक देता है, तो इससे यूरोपीय सुरक्षा का पूरा ताना-बाना बिखर जाएगा और युद्ध में यूक्रेन की स्थिति और अधिक नाजुक हो जाएगी।
भारतीय परिपेक्ष्य में, यूरोप के भीतर उभरी यह अंदरूनी फूट वैश्विक कूटनीति में भारत के रुख को सही साबित करती है। भारत ने शुरू से ही कहा था कि यूरोप के इस संघर्ष के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति पर बुरा असर पड़ रहा है। पश्चिमी देशों की आपसी खींचतान यह दर्शाती है कि कोई भी देश लंबे समय तक अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों से समझौता करके युद्ध का बोझ नहीं उठा सकता।
आर्थिक मोर्चे पर, पोलैंड और यूक्रेन के बीच कृषि व्यापार बाधित होने से वैश्विक बाजारों में सूरजमुखी तेल और गेहूं की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों के लिए यूक्रेन और यूरोपीय देशों से आयात पर निर्भर रहता है। इसलिए भारतीय वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति पर सतर्कता से नजर रख रहा है ताकि घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और अनाज की कीमतें स्थिर बनी रहें।
कुल मिलाकर, पोलैंड और यूक्रेन के बीच यह कूटनीतिक दरार यह साबित करती है कि लंबे खींचते युद्धों से दोस्तों के बीच भी दरारें आ जाती हैं। यूरोप का यह संकट पश्चिमी एकता के लिए एक बड़ा टेस्ट बन चुका है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण समाधान की अपनी अपील पर कायम है और विश्व मंच पर एक संतुलित शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
#PolandUkraineRift #NATOCrisis #EuropeanPolitics #GlobalFoodSupply #IndiaForeignPolicy #GeopoliticsEurope #EconomicWarfare