ब्रिटेन और मध्य पूर्व के बीच कूटनीतिक दरार उस समय एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक बयान में खुलासा किया कि ब्रिटेन में अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक प्रमुख एयरबेस पर हुए हालिया संदिग्ध आतंकी हमले की साजिश के तार सीधे तौर पर ईरान से जुड़े होने के "मजबूत संकेत" मिले हैं। इस खुलासे के बाद यूके-ईरानी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है और ब्रिटेन ने लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर कड़े कूटनीतिक प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह एयरबेस वही रणनीतिक ठिकाना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी और ब्रिटिश वायुसेना मध्य पूर्व में आतंकवादी समूहों और ईरानी समर्थक विद्रोहियों के खिलाफ हवाई अभियानों के संचालन के लिए करते रहे हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस सीधे आरोप ने नाटो सहयोगियों को सतर्क कर दिया है। वाशिंगटन और लंदन अब ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से नए और कड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व सैन्य प्रतिबंधों का खाका तैयार कर रहे हैं।
तेहरान ने ब्रिटेन के इन आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और 'पश्चिमी दुष्प्रचार' करार देकर खारिज किया है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ईरान अपनी 'हाइब्रिड वॉरफेयर' (Hybrid Warfare) नीति के तहत पश्चिमी धरती पर सीधे या अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए अमेरिकी व यूरोपीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की नई रणनीति पर काम कर रहा है। इस घटना से ब्रिटेन और यूरोप में सुरक्षा का स्तर उच्चतम अलर्ट पर ला दिया गया है।
भारतीय परिपेक्ष्य में, ब्रिटेन और ईरान के बीच बढ़ती यह कूटनीतिक तनातनी भारत के लिए बेहद संवेदनशील मामला है। भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, विशेष रूप से 'चाबहार बंदरगाह' (Chabahar Port) और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के संदर्भ में, जो भारत को मध्य एशिया और रूस तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। दूसरी ओर, ब्रिटेन के साथ भारत का एक बड़ा व्यापारिक व रणनीतिक गठबंधन है।
यदि पश्चिमी देश ईरान पर नए कड़े प्रतिबंध लगाते हैं या सैन्य प्रतिक्रिया देते हैं, तो भारत के चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट और मध्य पूर्व के रास्ते होने वाले भारतीय व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
निष्कर्ष यह है कि यूरोप की धरती पर ईरान के कथित हस्तक्षेप ने पश्चिमी देशों और मध्य पूर्व के बीच सीधी भिड़ंत का नया मोर्चा खोल दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए चाबहार और मध्य पूर्व में अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखना होगा।
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