यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) के प्रशासनिक और सुरक्षा क्षेत्र में देर रात हुए रूस के अभूतपूर्व मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों ने पूरे पूर्वी यूरोप की सुरक्षा प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। रूसी सेना द्वारा दागी गई हाइपरसोनिक मिसाइलों ने सीधे यूक्रेन की मुख्य खुफिया एजेंसी 'सिक्योरिटी सर्विस ऑफ यूक्रेन' (SSU) के केंद्रीय मुख्यालय की बहुमंजिला इमारत को निशाना बनाकर उसे आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया। इस भीषण प्रहार में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, दर्जनों घायल हुए और हैरान कर देने वाली बात यह रही कि मृतकों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस हमले की पुष्टि की और बताया कि रूसी मिसाइल स्ट्राइक का मुख्य लक्ष्य एसएसयू के कार्यवाहक प्रमुख ओलेक्सैंड्र पोकलाद (Oleksandr Poklad) को समाप्त करना था, जो बाल-बाल बच गए। कीव के सरकारी दिल पर हुए इस सीधे और सटीक हमले ने यह साबित कर दिया है कि रूसी खुफिया तंत्र को यूक्रेन के शीर्ष सैन्य कमान और सुरक्षा इमारतों की सटीक लोकेशन की जानकारी हासिल है। इस हमले ने कीव के वायु रक्षा तंत्र (Patriot Missile Systems) की कमियों को भी पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस प्रहार का बचाव करते हुए कहा है कि यह यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र में किए जा रहे ड्रोन हमलों और शीर्ष रूसी सैन्य कमांडरों को निशाना बनाने के प्रयासों का एक 'सटीक और माकूल प्रतिशोध' है। इस ताज़ा हमले के बाद यूक्रेन के कई शहरों में ब्लैकआउट छा गया है और पानी व बिजली की आपूर्ति ठप्प हो गई है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने कीव में नागरिक ढाँचे और रिहायशी इमारतों पर हुए इस भीषण हमले की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए यूक्रेन को और अधिक उन्नत रक्षा प्रणालियां देने का वादा किया है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में, कीव पर हुए इस हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत की खबर ने नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में हड़कंप मचा दिया है। युद्ध शुरू होने के इतने सालों बाद भी यूक्रेन में फंसे या व्यावसायिक कारणों से रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अब भारत सरकार के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और तात्कालिक मुद्दा बन गई है। भारतीय दूतावास ने तुरंत कीव और आसपास के इलाकों में रहने वाले सभी भारतीयों के लिए नई और सख्त एडवाइजरी जारी कर उन्हें सुरक्षित स्थानों या पड़ोसी यूरोपीय देशों में शरण लेने को कहा है।
इसके साथ ही, रूस-यूक्रेन युद्ध का यह नया और भीषण रूप भारत की उस शांति पहल (Peace Diplomacy) को गहरा झटका पहुंचाता है जिसकी वकालत भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर लगातार करते रहे हैं। भारत ने हमेशा यह रुख बनाए रखा है कि "यह युद्ध का युग नहीं है" और किसी भी विवाद का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति से ही संभव है। लेकिन दोनों पक्षों की ओर से शीर्ष कमान केंद्रों पर हो रहे सीधे हमले यह दिखाते हैं कि शांति की वार्ता अभी बहुत दूर है।
सामरिक और आर्थिक मोर्चे पर, भारत इस संघर्ष के लंबे खींचने से होने वाले वैश्विक खाद्य और उर्वरक (Fertilizer) संकट पर कड़ी नजर रखे हुए है। भारत रूस से सस्ती ऊर्जा का आयात जारी रखते हुए भी यूक्रेन में मानवीय सहायता भेजना जारी रखे हुए है। भारत का यह मानवीय और निष्पक्ष रुख यह दर्शाता है कि वह युद्ध की विभीषिका में अपने नागरिकों की जान-माल की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वैश्विक शांति की मशाल को थामे रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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