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प्रशांत में बारूद: ड्रैगन की नई घेराबंदी

दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य के बाद अब इंडो-पैसिफिक का पानी बेहद गर्म हो चुका है। चीनी नौसेना ने प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के पास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास शुरू करके अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती दे दी है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
05 Oct 2026
Solar farm during sunset

दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य के बाद अब इंडो-पैसिफिक का पानी बेहद गर्म हो चुका है। चीनी नौसेना ने प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के पास बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास शुरू करके अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती दे दी है। इस आक्रामक सैन्य अभ्यास से ऑस्ट्रेलिया से लेकर जापान तक में भारी खलबली मच गई है, क्योंकि चीन अब सीधे उन मार्गों पर नियंत्रण पाना चाहता है जहाँ से अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है।  

ग्लोबल न्यूज पोर्टल्स के अनुसार, चीन ने अपने उन्नत एयरक्राफ्ट कैरियर और हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम से लैस युद्धपोतों को प्रशांत के रणनीतिक द्वीपों के करीब तैनात कर दिया है। इसे पश्चिमी शक्तियों की 'सेकंड आइलैंड चेन' को काटने की एक सोची-समझी साजिश माना जा रहा है। चीन का यह कदम सिर्फ सैन्य शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के संसाधनों पर एकाधिकार जमाने की कोशिश है।  

अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है, जिससे नौसैनिक मुठभेड़ का खतरा चरम पर पहुँच गया है। कई मौकों पर अमेरिकी और चीनी लड़ाकू विमानों के बीच आमने-सामने की स्थितियां बनी हैं। इस सैन्य तनातनी ने पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिससे एक बड़े वैश्विक संघर्ष का डर सताने लगा है।  

भारत के दृष्टिकोण से, प्रशांत क्षेत्र में चीन का यह आक्रामक व्यवहार सीधे तौर पर भारत-प्रशांत सुरक्षा से जुड़ा है। भारत का 'QUAD' (क्वाड) समूह में होना और 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत इस क्षेत्र में उपस्थिति दर्ज कराना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। भारत किसी भी देश द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के खिलाफ है और 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' का जोरदार समर्थन करता है।  

भारतीय नौसेना ने भी अपनी अंडमान और निकोबार कमान को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि मलक्का जलडमरूमध्य पर पूरी नजर रखी जा सके। भारत का मानना है कि चीन अगर प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका को उलझाए रखता है, तो वह हिंद महासागर में भी अपनी हरकतों को तेज कर सकता है। इसलिए भारतीय नौसेना अपने गश्ती जहाजों और पनडुब्बियों के जरिए हिंद महासागर के हर प्रवेश द्वार पर पैनी नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत में ड्रैगन की यह चाल भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीतियों को और मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रही है। भारत अब फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर त्रिपक्षीय सुरक्षा ढाँचे को नया रूप दे रहा है, जिससे चीनी विस्तारवाद पर लगाम कसी जा सके।  

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