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मिडल ईस्ट स्काईवे बंद: 6 लाख मुसाफिर अधर में

गल्फ और मिडिल ईस्ट का आसमान इस वक्त जंग के सबसे भयंकर मुहाने पर खड़ा है। इजराइल, ईरान और लेबनान के बीच भड़के सीधे सैन्य टकराव और मिसाइल हमलों के खतरे के चलते समूचे मध्य पूर्व की एयरस्पेस को रातों-रात सील कर दिया गया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
05 Oct 2026
Solar farm during sunset

गल्फ और मिडिल ईस्ट का आसमान इस वक्त जंग के सबसे भयंकर मुहाने पर खड़ा है। इजराइल, ईरान और लेबनान के बीच भड़के सीधे सैन्य टकराव और मिसाइल हमलों के खतरे के चलते समूचे मध्य पूर्व की एयरस्पेस को रातों-रात सील कर दिया गया है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब्स पर सन्नाटा पसर गया है और करीब 6 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं।

एमिरेट्स, एतिहाद और फ्लाईदुबई जैसी दिग्गज एयरलाइंस ने ईरान, इराक, लेबनान और जोर्डन के लिए अपनी सैकड़ों उड़ानें तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं। यूरोप से एशिया को जोड़ने वाला सबसे सुरक्षित हवाई मार्ग अब एक नो-फ्लाई जोन में तब्दील हो चुका है। उड़ानों को नया लंबा मार्ग (Rerouting) अपनाना पड़ रहा है, जिससे न केवल उड़ानों का समय 2 से 3 घंटे बढ़ गया है बल्कि विमानन ईंधन की खपत बढ़ने से टिकट के दाम आसमान छूने लगे हैं।

युद्ध के इस विकराल रूप ने वैश्विक नागरिक उड्डयन तंत्र की कमर तोड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन निकायों ने 31 अक्टूबर तक ईरानी और लेबनानी हवाई क्षेत्र से पूरी तरह परहेज करने की सख्त एडवाइजरी जारी की है। कमर्शियल उड़ानों के पास से गुजरती मिसाइलों और ड्रोन के खतरों ने एयरलाइंस कंपनियों को अपने क्रू और विमानों की सुरक्षा के लिए उड़ानें रोकने पर मजबूर कर दिया है।  

भारत के लिहाज से यह संकट अत्यंत संवेदनशील और दोहरा झटका देने वाला है। भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सबसे बड़ा केंद्र दुबई और अबू धाबी ही हैं। हजारों भारतीय यात्री इस वक्त मध्य पूर्व के हवाई अड्डों पर फंसे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने तुरंत 24x7 इमरजेंसी हेल्पलाइन डेस्क स्थापित किए हैं और एयर इंडिया तथा अन्य भारतीय कैरियरों को वैकल्पिक मार्गों से उड़ानों के संचालन के निर्देश दिए हैं।  

इस एयरस्पेस ब्लॉकेड से भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत के रिफाइंड ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और आईटी पेशेवरों की आवाजाही को बड़ा झटका लगा है। खाड़ी देशों में रह रहे करीब 85 लाख भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिक चिंताओं में सबसे ऊपर है, जिसके लिए नई दिल्ली कूटनीतिक रास्तों से लगातार संबंधित देशों के संपर्क में है।

यह वैश्विक एविएशन क्राइसिस यह साबित करता है कि आधुनिक दुनिया में एक क्षेत्रीय युद्ध किस तरह पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी को मिनटों में ठप्प कर सकता है। भारत अब अपने पश्चिमी हवाई संपर्कों को सुरक्षित करने के लिए मध्य एशियाई देशों के हवाई गलियारों (Central Asian Air Corridors) को मजबूत करने पर विचार कर रहा है।

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