दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्ततम व्यापारिक जलमार्गों में से एक, स्वेज नहर में एक विशालकाय अंतरराष्ट्रीय मालवाहक कंटेनर जहाज यांत्रिक खराबी के कारण तिरछा होकर फंस गया है। इस घटना ने पूरे वैश्विक समुद्री व्यापार नेटवर्क को पूरी तरह से ठप्प कर दिया है।
मिस्र के स्वेज नहर प्राधिकरण ने तुरंत कई शक्तिशाली टगबोट्स और ड्रेजिंग मशीनों को जहाज को सीधा करने और निकालने के काम में लगा दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस मार्ग को पूरी तरह से साफ करने में कई दिन लग सकते हैं। इस समय नहर के दोनों तरफ सैकड़ों बड़े जहाजों की कतारें लग चुकी हैं।
इस ब्लॉक की खबर फैलते ही वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हड़कंप मच गया है। यूरोप और एशिया के बीच होने वाले दैनिक अरबों डॉलर के व्यापार पर अचानक ब्रेक लग गया है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे तेल की खेपों में देरी के चलते कंपनियों ने नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है।
यदि यह नाकाबंदी कुछ और दिनों तक जारी रहती है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भारी दबाव पड़ेगा, जिससे दुनिया भर में निर्मित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंपनियों को महंगे वैकल्पिक हवाई या लंबे समुद्री रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: स्वेज नहर भारत के यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिकी पूर्व तट के साथ होने वाले अरबों डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का मुख्य जीवन रेखा है। इस नहर के बंद होने से भारतीय निर्यातकों के कंटेनर फंस गए हैं, जिससे माल की डिलीवरी में देरी हो रही है।
मार्ग में रुकावट से भारत के कपड़ा, कृषि और फार्मास्युटिकल्स निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है क्योंकि माल ढुलाई का किराया (Freight Cost) और बीमा प्रीमियम अचानक बढ़ गया है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है ताकि निर्यातकों के नुकसान को कम करने के लिए वैकल्पिक समाधान ढूंढे जा सकें।
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