सडान और मिस्र की सीमा के पास स्थित एक सूदूर सोने की खदान पर हुए अचानक भीषण हवाई हमले में कम से कम 72 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस खूनी हमले में दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस अप्रत्याशित तबाही ने उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र में कोहराम मचा दिया है।
सूडान में पिछले कई सालों से सेना और त्वरित समर्थन बलों (RSF) के बीच खूनी गृहयुद्ध जारी है, जिसके कारण पूरा देश खंड-खंड हो चुका है। यह ताज़ा हमला उस इलाके में हुआ है जहाँ स्थानीय गरीब लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए सोने की अवैध और पारंपरिक खदानों में काम करते थे। अचानक आसमान से बरसी आफत ने पल भर में दर्जनों परिवारों को उजाड़ दिया।
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है और उन्होंने सुरक्षा बलों तथा विद्रोही गुटों के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। देश के बुनियादी ढांचे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना भी असंभव सा हो गया है। मानवीय सहायता एजेंसियां इस इलाके में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने सूडान में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालातों और नागरिकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। जिनेवा के अधिकारियों का कहना है कि सूडान का यह संघर्ष अब दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में बदल चुका है, जहाँ आम जनता को दोनों तरफ से केवल मौत और बर्बादी मिल रही है।
भारत के लिए सूडान का यह संकट कूटनीतिक और आर्थिक दोनों रूपों से बेहद चिंताजनक है। सूडान के इस उथल-पुथल वाले इलाके में अतीत में भी भारतीय नागरिकों और प्रवासियों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर 'ऑपरेशन कावेरी' जैसे अभियान चलाने पड़े थे। अफ्रीका में भारत के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं।
इसके अलावा, लाल सागर के मुहाने पर स्थित सूडान और मिस्र की सीमाओं पर अस्थिरता होने से भारत के समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं। वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से इस क्षेत्र में शांति का होना भारत के लिए बेहद आवश्यक है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे।
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