जैसे-जैसे पूर्वी यूरोप के रणक्षेत्र में हाड़ कंपाने वाली और बर्फीली सर्दियां अपने चरम पर पहुंच रही हैं, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा यह खूनी महासमर और अधिक क्रूर तथा विध्वंसक मोड़ लेता जा रहा है। रूस की वायुसेना ने आज तड़के यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी और रणनीतिक रूप से बेहद अहम शहर ज़ापोरिज्जिया पर दर्जनों सुपरसोनिक मिसाइलों और कामिकेज़ ड्रोन से एक साथ भीषण हवाई हमले किए, जिसके धमाकों से पूरा शहर दहल उठा। इन हमलों में कई घनी आबादी वाली रिहायशी इमारतें और शहर का मुख्य पावर ग्रिड पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं।
इस दिल दहला देने वाले हवाई हमले में भारी संख्या में आम नागरिकों के मारे जाने और दर्जनों लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की दुखद सूचना मिली है, जिसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और नाटो सहयोगियों के सामने गिड़गिड़ाते हुए तत्काल प्रभाव से अत्याधुनिक पैट्रियट (Patriot) एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों की भारी खेप भेजने की आपातकालीन गुहार लगाई है। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि रूस अब यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद करके भीषण ठंड के मौसम में यूक्रेनी नागरिकों और सेना का मनोबल तोड़ने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहा है।
रूस और यूक्रेन के बीच इस भयंकर संघर्ष के लगातार खिंचने का सीधा और गंभीर असर भारत की खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आयात और उर्वरक (Fertilizer) आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा है। भारत ने शुरू से ही इस यूरोपीय युद्ध में किसी भी पक्ष का आंख मूंदकर समर्थन करने के बजाय हमेशा कूटनीति, तटस्थता और शांति वार्ता के मार्ग को ही एकमात्र समाधान माना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट रूप से दोहरा चुके हैं कि "यह युग युद्ध का नहीं है", और भारत लगातार पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की राह प्रशस्त करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है।
यह संघर्ष इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते, बल्कि वे नागरिकों के जीवन, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर मानवता को गहरे संकट में डालते हैं। पश्चिमी देशों और रूस के बीच चल रही इस महात्वाकांक्षा की लड़ाई ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। भारत जैसे देश, जो अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति के बल पर दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए हैं, वे वैश्विक शांति के सबसे बड़े पैरोकार के रूप में उभर रहे हैं और इस मानवीय त्रासदी के जल्द से जल्द शांतिपूर्ण अंत की उम्मीद कर रहे हैं।
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