लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर एक बार फिर बड़ा हमला हुआ है। बीबीसी और मैरीटाइम एग्जीक्यूटिव की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक वाणिज्यिक कार्गो जहाज को निशाना बनाकर एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन्स से हमला किया गया है। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई, हालांकि क्रू मेंबर्स ने किसी तरह अपनी जान बचाई। इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक लेन अब पूरी तरह से असुरक्षित हो चुकी है।
इस हमले की जिम्मेदारी स्थानीय विद्रोही गुटों ने ली है, जिनका दावा है कि वे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के विरोध में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय नौसेना गठबंधन के युद्धपोत मौके पर पहुंचे और जलते हुए जहाज को सहायता प्रदान की, लेकिन लगातार होते इन हमलों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। कई प्रमुख लॉजिस्टिक्स दिग्गजों ने अपने जहाजों को लाल सागर के रास्ते भेजने से पूरी तरह मना कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार का पहिया अचानक धीमा पड़ता दिख रहा है।
जहाजों को अब स्वेज नहर का छोटा और सुरक्षित रास्ता छोड़कर अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर पूरा महाद्वीप घूमकर जाना पड़ रहा है। इस लंबे रास्ते की वजह से मालवाहक जहाजों की यात्रा में 12 से 15 दिनों की भारी देरी हो रही है। इसके साथ ही, शिपिंग कंपनियों का ईंधन खर्च कई गुना बढ़ गया है और बीमा प्रीमियम आसमान छूने लगा है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि दुनिया भर में आयातित वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाओं और खाद्य पदार्थों की लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है।
अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना ने लाल सागर में गश्त बढ़ा दी है और कई ड्रोन व मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी के बावजूद इन हमलों पर पूरी तरह लगाम लगाना नामुमकिन साबित हो रहा है। सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलों से करोड़ों डॉलर के जहाजों को निशाना बनाने की यह नई 'असममित युद्धप्रणाली' (asymmetric warfare) ने दुनिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं की रणनीतियों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह संकट भारत के निर्यात और आयात दोनों के लिए अत्यंत घातक साबित हो रहा है। भारत का यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के साथ होने वाला एक बड़ा व्यापार इसी लाल सागर के रास्ते से गुजरता है। भाड़ा बढ़ने और जहाजों के देरी से पहुंचने के कारण भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अरब सागर और अदन की खाड़ी में कई युद्धपोत तैनात करने पड़े हैं, जिससे देश पर अतिरिक्त सुरक्षा और आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
समुद्री रास्ते पर मचा यह आतंक वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए और गहरे मंदी के दौर में धकेल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समुद्री डकैती और आतंकवाद पर जल्द ही कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाया, तो स्वेज नहर का यह पूरा जलमार्ग ठप हो जाएगा। दुनिया भर के बाजार इस समय सांस रोके खड़े हैं, क्योंकि अगर व्यापारिक जहाजों पर यूं ही हमले होते रहे, तो आम आदमी की जेब पर इसका असर बेहद खौफनाक होने वाला है।
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