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सुवा के पास चीनी युद्धपोत

दक्षिण प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश फिजी की राजधानी सुवा के बेहद करीब दो चीनी नौसैनिक युद्धपोतों और एक अत्याधुनिक सर्विलांस जहाज के अचानक लंगर डालने से पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
07 Oct 2026
Solar farm during sunset

दक्षिण प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश फिजी की राजधानी सुवा के बेहद करीब दो चीनी नौसैनिक युद्धपोतों और एक अत्याधुनिक सर्विलांस जहाज के अचानक लंगर डालने से पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय बंदरगाह प्रशासन के अनुसार, चीनी जहाजों ने ईंधन भरने और चालक दल के विश्राम का हवाला दिया है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की खुफिया एजेंसियों ने इसे प्रशांत क्षेत्र में चीन के स्थायी सैन्य ठिकाने की तैयारी बताया है। इस इलाके में किसी बाहरी महाशक्ति के ऐसे भारी नौसैनिक जमावड़े ने क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को हिलाकर रख दिया है।

इस नौसैनिक हलचल का आर्थिक और रणनीतिक गणित बेहद जटिल है। प्रशांत महासागर के यह संकरे समुद्री मार्ग अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के बीच होने वाले 1.8 ट्रिलियन डॉलर के वार्षिक व्यापार की मुख्य धमनी हैं। इन जलमार्गों के पास चीनी जहाजों की मौजूदगी से ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की नौसैनिक निगरानी प्रणालियों पर सीधा असर पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने तुरंत अपने दो टोही विमान और एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट को चीनी जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुवा के पास रवाना कर दिया है।

विश्लेषकों के अनुसार, छोटे प्रशांत द्वीपों को भारी कर्ज और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लालच देकर अपनी ओर आकर्षित करना चीन की पुरानी रणनीति रही है। फिजी और आसपास के द्वीपों में बंदरगाहों का विस्तार कर चीन अपने समुद्री प्रभाव को अमेरिका की पहली और दूसरी रक्षा पंक्ति के करीब ले जाना चाहता है। इससे प्रशांत महासागर में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

भारत के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'सगर' (SAGAR) विजन का दायरा अब केवल हिंद महासागर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशांत महासागर तक फैल चुका है। फिजी में भारतीय मूल की लगभग 37 प्रतिशत आबादी रहती है और भारत के फिजी के साथ गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं। फिजी के इतने करीब चीनी नौसैनिकों की मौजूदगी भारत के रणनीतिक साझेदारों—ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका—के लिए सीधी चुनौती है।

यदि चीन प्रशांत महासागर के इन समुद्री रास्तों पर अपना वर्चस्व जमा लेता है, तो भारत के पूर्वी देशों के साथ होने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगेंगे। इसके अलावा, क्वाड (QUAD) समूह के एक प्रमुख सदस्य के रूप में भारत पर भी प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में सहयोग करने का दबाव बढ़ेगा। भारत पहले ही फिजी में अस्पताल और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर चुका है।

इस स्थिति का मुख्य टेकअवे यह है कि भारत को प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ अपने विकास सहयोग और समुद्री सुरक्षा संवाद को और अधिक तेज करना होगा। भारत को केवल हिंद महासागर तक सीमित रहने के बजाय अपने नौसैनिक और कूटनीतिक दायरों को प्रशांत महासागर तक मजबूती से बढ़ाना होगा। फिजी जैसे साझेदारों को यह भरोसा दिलाना अनिवार्य है कि उनकी सुरक्षा और विकास के लिए भारत और उसके मित्र देश एक पारदर्शी और विश्वसनीय विकल्प हैं।

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