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रूसी सेंटर-2026: मॉस्को का शक्ति प्रदर्शन

यूक्रेन में जारी भयंकर युद्ध के बावजूद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। रूस ने यूराल और कैस्पियन सागर क्षेत्र में 'सेंटर-2026' (Center-2026) नाम से एक विशालकाय बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास का आयोजन किया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
05 Oct 2026
Solar farm during sunset

यूक्रेन में जारी भयंकर युद्ध के बावजूद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। रूस ने यूराल और कैस्पियन सागर क्षेत्र में 'सेंटर-2026' (Center-2026) नाम से एक विशालकाय बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास का आयोजन किया है। इस युद्धाभ्यास में 47,000 से अधिक सैनिकों, सैकड़ों लड़ाकू विमानों और आधुनिक ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन करके रूस ने यह साबित कर दिया है कि वह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अकेला नहीं पड़ा है।

इस सैन्य अभ्यास की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें चीन, पाकिस्तान, मंगोलिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और तजाकिस्तान जैसे देशों की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। रूस ने इस अभ्यास में यूक्रेन युद्ध से सीखे गए जमीनी अनुभवों—जैसे जेट संचालित गेरान (Geran) ड्रोन्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर—का प्रदर्शन किया। इस कदम से मॉस्को ने पश्चिमी दुनिया और नाटो (NATO) को अपनी अटूट सैन्य और रणनीतिक क्षमता का कड़ा संदेश दिया है।  

पश्चिमी रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्धाभ्यास यह दिखाता है कि रूस गैर-पश्चिमी देशों का एक मजबूत रक्षा ब्लॉक तैयार करने में काफी हद तक सफल रहा है। नाटो के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए यह एक 'गैर-नाटो सुरक्षा नेटवर्क' का रूप लेता जा रहा है, जहाँ सदस्य देश अपनी सेनाओं के बीच सामंजस्य बढ़ा रहे हैं।

भारत के नजरिए से यह शक्ति प्रदर्शन बेहद पेचीदा और रणनीतिक संतुलन की मांग करता है। भारत इस युद्धाभ्यास में पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में तो शामिल रहा, लेकिन पाकिस्तान और चीन की सीधी भागीदारी ने भारत के रणनीतिकारों को चौकन्ना कर दिया है। भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत हैं, लेकिन चीन-पाकिस्तान-रूस की यह बढ़ती दूरी भारत के लिए चिंता का विषय है।

भारत की स्पष्ट कूटनीति है कि वह रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को बनाए रखते हुए भी किसी ऐसे ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसे पश्चिमी देशों या अमेरिका से दूर करे। भारत रूस से अपनी सैन्य आपूर्ति और रियायती कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है, जबकि अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशीकरण (Make in India) को बढ़ावा दे रहा है।

सेंटर-2026 ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया अब बहुध्रुवीय (Multipolar) हो चुकी है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के बल पर रूस, अमेरिका और चीन तीनों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए व्यवहार कर रहा है।  

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