पश्चिम एशिया का युद्ध अब उस मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ पूरी दुनिया की साँसें थमी हुई हैं। फारस की खाड़ी में अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती और ईरान द्वारा Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक ईंधन बाजार में आग लगा दी है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र अब एक ऐसा बारूद का ढेर बन गया है, जहाँ से एक छोटी सी चिंगारी विश्व अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकती है।
अमेरिकी युद्धपोतों की बढ़ती मौजूदगी और ईरानी नौसेना के बीच सीधा टकराव शुरू हो चुका है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक इस समुद्री मार्ग से किसी भी पश्चिमी देश के जहाजों को गुजरने नहीं दिया जाएगा। इस सीधे टकराव ने न केवल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ला दिया है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी एक गहरे संकट में धकेल दिया है।
इस भयंकर संकट के बीच नई दिल्ली का रुख बेहद चालाकी और दूरदर्शिता भरा है। भारत अपनी 'मल्टी-अलाइनमेंट' यानी बहु-पक्षीय कूटनीति के जरिए दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत संतुलन बना रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका के साथ भारत का रक्षा सहयोग जारी है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के चाबहार पोर्ट परियोजना के जरिए भारत ने अपनी वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति रेखा सुरक्षित रखी है।
भारत के लिए यह संकट केवल तेल का नहीं, बल्कि खाड़ी देशों में मौजूद करीब 80 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का भी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने पर्दे के पीछे से कूटनीतिक चैनल सक्रिय कर दिए हैं। भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक ठप्प रहता है, तो भारत रूस और मध्य एशियाई देशों के माध्यम से वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों का तुरंत इस्तेमाल बढ़ा देगा।
इस पूरे घटनाक्रम में चीन भी अपनी पैठ बनाने की फिराक में है, लेकिन भारत की सतर्कता ने बीजिंग को किसी भी एकतरफा बढ़त से रोक दिया है। ग्लोबल साउथ के अग्रणी देश के रूप में भारत अब इस वैश्विक तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका में उभर रहा है। भारतीय रिफाइनरियों के पास पर्याप्त स्टॉक होने के कारण तात्कालिक झटका कम है, लेकिन दीर्घकालिक रणनीति पर काम तेज हो गया है।
अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो दुनिया की आर्थिक सत्ता का केंद्र एशिया की ओर तेजी से खिसकेगा, जिसमें भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखते हुए सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।
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