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यमन में फिर से शुरू हुई जंग ने लाल सागर का व्यापारिक मार्ग ठप्प किया

मध्य पूर्व के सबसे अशांत इलाकों में से एक, यमन में गृहयुद्ध और भयंकर सैन्य संघर्ष अचानक फिर से भड़क उठा है, जिससे पूरे लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में भुखमरी और सुरक्षा संकट विकराल हो गया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
03 Oct 2026
Solar farm during sunset

मध्य पूर्व के सबसे अशांत इलाकों में से एक, यमन में गृहयुद्ध और भयंकर सैन्य संघर्ष अचानक फिर से भड़क उठा है, जिससे पूरे लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में भुखमरी और सुरक्षा संकट विकराल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि नए सिरे से शुरू हुए हमलों और बुनियादी ढांचे के विनाश से यमन में खाद्य सुरक्षा संकट गहरा गया है, जिसका असर पड़ोसी देशों तक फैल सकता है।  

लाल सागर और बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य के मुहाने पर यमन की रणनीतिक स्थिति होने के कारण, इस नए सैन्य संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट नेवी के लिए भारी खतरा पैदा कर दिया है। विद्रोही गुटों द्वारा कमर्शियल कार्गो जहाजों और कंटेनर शिप्स पर ड्रोन व मिसाइल हमलों की धमकियों ने लाल सागर के जरिए होने वाले स्वेज नहर के व्यापार मार्ग को पूरी तरह से बाधित कर दिया है।

स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और एशिया के बीच होने वाला अरबों डॉलर का व्यापार अब अनिश्चितता के घेरे में है। कई अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने अपने जहाजों को लाल सागर के रास्ते भेजने के बजाय अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर भेजने का लंबा और खर्चीला रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है। इससे वैश्विक माल ढुलाई का समय और लागत दोनों काफी बढ़ गए हैं।

यमन के भीतर मानवीय स्थिति और बिगड़ गई है, जहाँ लाखों लोग भोजन, स्वच्छ पानी और दवाओं की किल्लत का सामना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने मानवीय गलियारे (Humanitarian Corridors) खोलने की मांग की है, लेकिन युद्धरत गुटों के बीच किसी भी सहमति के अभाव में राहत सामग्री के जहाज बंदरगाहों पर अटके हुए हैं।

भारतीय परिपेक्ष्य में विश्लेषण:

यमन संकट और लाल सागर में व्यापारिक रुकावट का सीधा असर भारत के विदेशी व्यापार पर पड़ता है। भारत का यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर अफ्रीका के साथ अधिकांश व्यापार स्वेज नहर और लाल सागर के रास्ते ही होता है। व्यापारिक जहाजों का मार्ग बदलने से भारतीय निर्यातकों के लिए शिपिंग किराया (Freight Cost) काफी बढ़ जाता है, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे हो जाते हैं। इसके अलावा, लाल सागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना लगातार अपने युद्धपोतों के जरिए भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। भारत यमन में जल्द से जल्द युद्धविराम और लाल सागर में सुरक्षित नौवहन की उम्मीद करता है।

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