मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप, दोनों ही मोर्चों पर इस समय गंभीर आंतरिक और क्षेत्रीय संकट गहरा गए हैं। पश्चिमी तट (West Bank) के क्षेत्रों में इजरायली बसने वालों (Settlers) की हिंसा में अचानक भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे फिलीस्तीनी आबादी में आक्रोश और मानवीय संकट विकराल रूप ले चुका है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इस बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यह स्थिति किसी बड़े क्षेत्रीय विस्फोट का कारण बन सकती है।
दूसरी ओर, पूर्वी यूरोप में यूक्रेन के सबसे प्रमुख और भरोसेमंद सहयोगियों में से एक, पोलैंड के साथ उसके संबंधों में गंभीर दरारें दिखने लगी हैं। पोलैंड के भीतर यूक्रेन की संभावित यूरोपीय संघ (EU) सदस्यता को लेकर विरोध की लहर तेज हो गई है। पोलिश किसानों और ट्रांसपोर्टरों को आशंका है कि यूक्रेनी कृषि उत्पादों और सेवाओं के ईयू बाजार में स्वतंत्र प्रवेश से उनकी आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाएगी, जिसके कारण वारसॉ और कीव के बीच आपसी विश्वास न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
पश्चिमी तट की हिंसा ने मध्य पूर्व में शांति बहाली की तमाम कूटनीतिक कोशिशों को झटका दिया है। जमीनों के कब्जे और बस्तियों के विस्तार को लेकर हो रही झड़पें क्षेत्र में एक नए सुरक्षा संकट को जन्म दे रही हैं। अरब जगत और पश्चिमी देशों की ओर से इजरायली प्रशासन पर कानून-व्यवस्था सख्ती से लागू करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
वहीं, पोलैंड और यूक्रेन का यह मनमुटाव नाटो और यूरोपीय संघ की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। युद्ध के दौर में अटूट समर्थन देने वाले पोलैंड का यह यू-टर्न यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान के सामने राष्ट्रीय राजनीति किस तरह रणनीतिक प्राथमिकताओं को बदल देती है। रूस इस स्थिति पर बारीक नजर बनाए हुए है और पश्चिमी देशों की इस फूट का रणनीतिक फायदा उठा सकता है।
भारत 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' का हमेशा से समर्थक रहा है और पश्चिमी तट पर बढ़ती हिंसा क्षेत्र में शांति के भारतीय प्रयासों के विपरीत है, जहां लाखों भारतीय रहते हैं। वहीं, पोलैंड और यूक्रेन का बढ़ता अविश्वास यह साबित करता है कि यूरोप का युद्ध अब आर्थिक मोर्चे पर थकावट की ओर बढ़ रहा है। भारत के लिए, यूरोप में यह राजनीतिक दरार और पश्चिम एशिया का तनाव दोनों ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता पैदा करते हैं। भारत को अपनी गुटनिरपेक्ष और संतुलित विदेश नीति के तहत इन दोनों संवेदनशील मुद्दों पर तटस्थ रहते हुए अपने व्यापारिक व सामरिक हितों की रक्षा करनी होगी।
#WestBankTension #PolandUkraine #EuropeanUnion #Geopolitics #MiddleEastCrisis #NATOIntegrity #IndiaForeignPolicy #WorldAffairs #GlobalCrisis #BreakingNews