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उत्तरी काकेशस में रूस का बड़ा कूटनीतिक दांव: एशिया-अफ्रीका को साधा

पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक अलगाव को चुनौती देते हुए रूस ने अपने सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र 'उत्तरी काकेशस' (North Caucasus) में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय मंच का आयोजन कर दुनिया को चौंका दिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
03 Oct 2026
Solar farm during sunset

पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक अलगाव को चुनौती देते हुए रूस ने अपने सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र 'उत्तरी काकेशस' (North Caucasus) में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय मंच का आयोजन कर दुनिया को चौंका दिया है। 'संवाद, परंपराएं और विकास' थीम पर आधारित इस सम्मेलन में एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के दर्जनों देशों के शीर्ष राजनयिकों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया है। मास्को या सेंट पीटर्सबर्ग के बजाय इस क्षेत्र का चयन रूस का एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल माना जा रहा है।  

उत्तरी काकेशस क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से आंतरिक अशांति और सुरक्षा चुनौतियों के लिए जाना जाता रहा है। इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मेजबानी करके क्रेमलिन पश्चिमी देशों को यह संदेश देना चाहता है कि उसके अशांत समझे जाने वाले सीमांत इलाके भी अब पूरी तरह सुरक्षित, स्थिर और विदेशी निवेश के लिए तैयार हैं। इस मंच के जरिए कृषि, तकनीक हस्तांतरण और नए व्यापारिक गलियारों के निर्माण पर दर्जनों अनौपचारिक सहमतियां बनी हैं।  

एशियाई और अफ्रीकी देशों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि ग्लोबल साउथ का एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना रूस के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने का इच्छुक है। इस मंच ने रूस को यूरेशिया के भीतर अपने नए व्यापारिक मार्गों (जैसे उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा) को और मजबूत करने का अवसर दिया है।

पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि रूस अपने प्रभाव क्षेत्र का तेजी से विस्तार कर रहा है और यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी स्वीकार्यता दिखाने की एक बड़ी कोशिश है। इस आयोजन से यूरोप की सीमाओं के ठीक पास एक नया भू-राजनीतिक व्यापारिक केंद्र उभरता हुआ दिख रहा है।

भारतीय परिपेक्ष्य में विश्लेषण:

उत्तरी काकेशस का यह रणनीतिक क्षेत्र भारत के 'अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे' (INSTC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत इस मार्ग के जरिए ईरान और रूस के रास्ते यूरोप और मध्य एशिया तक कम लागत में माल भेजना चाहता है। इस क्षेत्र में स्थिरता और नए व्यापारिक समझौतों से भारत के लिए कनेक्टिविटी आसान होगी। नई दिल्ली हमेशा से बहुध्रुवीय दुनिया का समर्थन करती रही है, और रूस का एशिया-अफ्रीका के साथ बढ़ता तालमेल भारत के व्यापारिक विविधीकरण की दृष्टि से बेहद मददगार साबित हो सकता है।  

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