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थाईलैंड और कंबोडिया में समुद्री सीमा पर भीषण विवाद

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक नए रणनीतिक मोर्चे का विस्फोट हो गया है, जहाँ थाईलैंड और कंबोडिया के बीच थाई की खाड़ी (Gulf of Thailand) में स्थित प्राकृतिक गैस और तेल भंडार से समृद्ध समुद्री सीमा को लेकर विवाद चरम पर पहुँच गया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
03 Oct 2026
Solar farm during sunset

दक्षिण-पूर्व एशिया में एक नए रणनीतिक मोर्चे का विस्फोट हो गया है, जहाँ थाईलैंड और कंबोडिया के बीच थाई की खाड़ी (Gulf of Thailand) में स्थित प्राकृतिक गैस और तेल भंडार से समृद्ध समुद्री सीमा को लेकर विवाद चरम पर पहुँच गया है। दोनों देशों ने विवादित क्षेत्रों में अपने-अपने युद्धपोतों और नौसैनिक गश्तों की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे इस क्षेत्र में किसी भी समय सैन्य झड़प की आशंका गहरा गई है।

दोनों पड़ोसी राष्ट्रों के बीच यह विवाद दशकों पुराना है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत दावों को कानूनी रूप देने की हालिया होड़ ने आग में घी डालने का काम किया है। थाई की खाड़ी में अरबों डॉलर के हाइड्रोकार्बन और गैस भंडार मौजूद हैं। ऊर्जा संकट से जूझ रहे दोनों देश इन संसाधनों पर अपना विशेष आर्थिक अधिकार साबित करने के लिए आमने-सामने आ गए हैं।  

आशियान (ASEAN) गुट ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि, कंबोडिया द्वारा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में ले जाने और थाईलैंड द्वारा घरेलू राजनीतिक दबाव के चलते कड़ा रुख अपनाने से स्थिति लगातार पेचीदा होती जा रही है। द्विपक्षीय व्यापार और सीमा पार पर्यटन पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।

इस तनाव में महाशक्तियों का हस्तक्षेप भी शुरू हो गया है। चीन, जो दोनों देशों में व्यापक बुनियादी ढांचा निवेश कर चुका है, अपने क्षेत्रीय ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। वहीं पश्चिमी देश दक्षिण-पूर्व एशिया में अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। यदि यह विवाद बढ़ता है, तो यह आशियान क्षेत्र की स्थिरता को बड़ा झटका दे सकता है।

भारतीय परिपेक्ष्य में विश्लेषण:

भारत की 'एक्ट ईस्ट Policy' और 'इंडो-पैसिफिक विजन' के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता अत्यंत आवश्यक है। थाईलैंड भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार है, जबकि कंबोडिया के साथ भी भारत के ऐतिहासिक संबंध हैं। थाई की खाड़ी में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव बंगाल की खाड़ी से जुड़ने वाले भारतीय समुद्री व्यापार और आपूर्ति मार्गों पर असर डाल सकता है। भारत आशियान की एकजुटता और UNCLOS के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में खुला और सुरक्षित व्यापार तंत्र बना रहे।

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