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केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला पुराना केस!

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब केरल की राज्य सरकार ने उनके खिलाफ लगभग दो दशक पुराने एक मामले में प्रशासनिक जांच के आदेश जारी कर दिए।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
06 Oct 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब केरल की राज्य सरकार ने उनके खिलाफ लगभग दो दशक पुराने एक मामले में प्रशासनिक जांच के आदेश जारी कर दिए। यह मामला उस समय का है जब ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के रूप में राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) में सचिव पद पर तैनात थे। राज्य सरकार के इस कदम ने केंद्र और राज्य के बीच एक नए कूटनीतिक व कानूनी टकराव को जन्म दे दिया है।

केरल के विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को सौंपी गई इस जांच में अंगामली-तिरुवनंतपुरम सड़क ढांचागत परियोजना में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं और निविदा प्रक्रियाओं के उल्लंघन की फाइलें दोबारा खोली गई हैं। राज्य सरकार का दावा है कि पुरानी सीएजी (CAG) रिपोर्ट और आंतरिक प्राथमिक जांच में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनकी विस्तृत और स्वतंत्र जांच होना कानूनी रूप से आवश्यक है।

इस कदम को केंद्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिशोध और मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब ज्ञानेश कुमार एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद (CEC) पर आसीन हैं, ऐसे समय में 20 साल पुरानी फाइलों को फिर से खोलना एक गंभीर राजनीतिक संदेश देता है। केंद्र सरकार के समर्थकों ने केरल सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक और संस्थागत दबाव बनाने की साजिश बताया है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह घटनाक्रम भारतीय नौकरशाही और राज्य-केंद्र संबंधों की जटिलता को उजागर करता है। जब किसी अखिल भारतीय सेवा (IAS) के अधिकारी को केंद्रीय संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाता है, तो उनके पुराने कैडर रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल राजनीतिक खींचतान में होना प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिरता के लिए चिंताजनक माना जाता है। इस कानूनी कदम से राज्य और केंद्र के बीच तनाव और गहराने की संभावना है।

केरल सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यह एक विशुद्ध प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई है जिसे किसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य जांच एजेंसी जल्द ही इस मामले में तत्कालीन फाइलों और अधिकारियों के बयानों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने वाली है।

अब यह मामला कानूनी रूप से बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। ज्ञानेश कुमार के कानूनी सलाहकारों द्वारा इस राज्यस्तरीय जांच को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नए बड़े घटनाक्रमों को जन्म दे सकता है।

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