पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क और क्रामटॉर्स्क क्षेत्रों में रूसी सेना ने एक बार फिर विनाशकारी मिसाइल और गाइडेड बम हमले किए हैं, जिसमें दर्जनों आम नागरिकों और बच्चों की मौत हो गई है। यूक्रेन में पिछले पांच सालों से जारी इस भीषण युद्ध के बीच रूसी वायुसेना ने रिहायशी इमारतों और नागरिक बसों को निशाना बनाया है। जवाब में यूक्रेन की सेना ने 'ऑपरेशन विवाल्डी' के तहत अत्याधुनिक ड्रोन और रोबोटिक हथियारों का इस्तेमाल करके रूसी कब्जे वाले इलाकों में पलटवार किया है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौते के तहत यूक्रेन युद्ध में "आंशिक युद्धविराम" (Partial Ceasefire) तय कर लिया है। हालांकि, अमेरिका के इस एकतरफा दावे पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कड़ा ऐतराज जताया है। ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के किसी भी समझौते की जानकारी उन्हें नहीं है और अमेरिका का यह दावा उनके लिए पूरी तरह से चौंकाने वाली खबर है।
युद्धविराम के लिए अमेरिका ने यूक्रेन पर दबाव बनाया था कि वह रूसी तेल रिफाइनरियों पर अपने ड्रोन हमले तुरंत रोक दे। लेकिन ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी मांग को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक मॉस्को यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर अपने हमले बंद नहीं करता, तब तक यूक्रेन रूसी तेल ठिकानों को तबाह करना जारी रखेगा। उधर, पूर्वी यूरोप में रूस की हाइब्रिड वॉरफेयर और जासूसी गतिविधियों ने पूरे यूरोप को खौफ में डाल दिया है।
यूरोपीय संघ (EU) के देश अब रूसी खतरे से निपटने के लिए अपनी रक्षा नीति को सख्त कर रहे हैं। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने खुलासा किया है कि उनकी हत्या की साजिश रचने वाले एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसके तार रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़े हो सकते हैं। इस तरह की घटनाओं ने पूरे यूरोप में यह डर पैदा कर दिया है कि अगर यूक्रेन युद्ध जल्द नहीं रुका, तो यह पूरे यूरोपीय महाद्वीप को अपनी चपेट में ले लेगा।
रूस और यूक्रेन के बीच खिंचते इस लंबे युद्ध का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक और मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, जबकि पश्चिम देश भारत से रूस पर दबाव बनाने की मांग करते रहते हैं। भारत ने हमेशा गुटनिरपेक्षता और कूटनीतिक संवाद का रास्ता चुना है। ज़ेलेंस्की द्वारा अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराए जाने से वैश्विक स्तर पर गेहूं, खाद्य तेल और उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला पर अनिश्चितता के बादल छाए रहेंगे।
भारत के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना एक बड़ी प्राथमिकता रहा है। लेकिन अगर यूक्रेन रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाना जारी रखता है, तो रूस का तेल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, भारत रक्षा पुर्जों के लिए भी काफी हद तक रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर पर निर्भर है। युद्ध लंबा खींचने से भारत के अपने सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में देरी हो सकती है, इसलिए भारत शांति का पक्षधर बना हुआ है।
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