पेन्टागन के गलियारों से बाहर आई एक गुप्त खबर ने पूरी दुनिया के रक्षा मंत्रालयों में हड़कंप मचा दिया है। वाशिंगटन में शीर्ष सैन्य जनरलों और राष्ट्रपति प्रशासन के बीच ईरान के सबसे गहराई में बने भूमिगत परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (GBU-43/B MOAB) के इस्तेमाल पर बेहद गंभीर चर्चा चल रही है। ईरानी मिसाइल हमलों और खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाए जाने के बाद, अमेरिका अब ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए इस महा-विनाशकारी गैर-परमाणु बम को गिराने के सबसे आक्रामक विकल्प पर विचार कर रहा है।
यह खबर आते ही मध्य पूर्व के युद्ध में एक बेहद भयानक और खौफनाक मोड़ आ गया है। 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' दुनिया का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार माना जाता है, जो जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बने बंकरों, मिसाइल साइलो और परमाणु प्रयोगशालाओं को मिट्टी में मिलाने की ताकत रखता है। जब 2017 में इसका इस्तेमाल अफगानिस्तान में किया गया था, तो कई किलोमीटर दूर तक जमीन हिल गई थी। ईरान के फोर्डो और नतांज स्थित भूमिगत परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने के लिए अमेरिका का यह रुख यह दर्शाता है कि अब वाशिंगटन आर-पार के मूड में आ चुका है।
इसी बीच ट्रम्प के उस बयान ने दुनिया को और ज्यादा उलझा दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि "ईरान से युद्ध बहुत जल्द खत्म होने वाला है और तेल के दाम पत्थर की तरह नीचे गिरेंगे"। लेकिन इसके ठीक उलट, अगर अमेरिकी वायुसेना ने सचमुच इस महा-बम को ईरान की धरती पर गिराया, तो खाड़ी क्षेत्र में ऐसा भयानक बारूदी बवंडर उठेगा जिसकी आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी। ईरानी सेना पहले ही कह चुकी है कि उसकी धरती पर हुआ कोई भी ऐसा हमला अमेरिका के सभी मध्य-पूर्वी सैन्य अड्डों का नामोनिशान मिटा देगा।
भारत के लिए यह खबर किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। यदि अमेरिका इस घातक हथियार का इस्तेमाल करता है, तो ईरान में फंसे हजारों भारतीय नागरिकों की जान सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगी। इसके अलावा, भारत का महत्वकांक्षी 'चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट' पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो सकता है। चाबहार के जरिए भारत मध्य एशिया और रूस तक अपना व्यापारिक मार्ग बना रहा है, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह महा-विनाशकारी युद्ध भारत की पूरी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति को तबाह कर सकता है।
इसके साथ ही, भारत में ऊर्जा संकट एक भीषण त्रासदी का रूप ले सकता है। यद्यपि ट्रम्प क्रूड ऑयल के दाम गिरने का दावा कर रहे हैं, लेकिन ईरान पर महा-बम का हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से श्मशान बना देगा। इससे भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति बिल्कुल ठप हो जाएगी, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम भारत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकते हैं। देश की अर्थव्यवस्था पर इसका जो मारक असर पड़ेगा, उससे उबरना भारत के लिए बेहद मुश्किल चुनौती होगी।
पूरी दुनिया अब एक तरह से सांस रोके वाशिंगटन और तेहरान के हर कदम को देख रही है। क्या अमेरिका सचमुच 21वीं सदी का सबसे बड़ा बंकर-बस्टर हमला करने जा रहा है, या फिर यह ईरान को घुटनों पर लाने के लिए खेला गया कोई भयानक कूटनीतिक 'माइंड गेम' है? जो भी हो, पर इस एक खबर ने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।
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