कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वायत्त हथियारों और साइबर युद्धक क्षमताओं को लेकर वैश्विक महाशक्तियों के बीच एक नई और खतरनाक होड़ छिड़ गई है। नवीनतम खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अग्रणी देश ऐसे एआई-संचालित ड्रोन और साइबर सिस्टम विकसित कर चुके हैं जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के लक्ष्य निर्धारित कर हमला करने में सक्षम हैं।
जिनेवा में स्वायत्त हथियारों के नियमन को लेकर बुलाई गई अंतर्राष्ट्रीय बैठक बिना किसी आम सहमति के समाप्त हो गई। प्रमुख सैन्य शक्तियां एआई प्रौद्योगिकियों पर सख्त नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने के समझौतों पर हस्ताक्षर करने से कतरा रही हैं, जिससे तकनीक की यह दौड़ अनियंत्रित होती दिख रही है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई हथियारों का नियंत्रण अगर हैकर्स या गैर-राज्य तत्वों (आतंकवादियों) के हाथों में चला गया, तो यह मानवता के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बन सकता है। बिना किसी मानवीय नैतिकता के फैसले लेने वाली मशीनें युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदल सकती हैं।
सिलिकॉन वैली से लेकर वैश्विक रक्षा प्रयोगशालाओं तक, साइबर वारफेयर और एआई-संचालित रक्षा प्रणालियों पर अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है। पारंपरिक युद्ध की जगह अब डिजिटल और स्वायत्त युद्ध ले रहे हैं।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: भारत इस नई तकनीकी क्रांति के दौर में पीछे नहीं रहना चाहता। रक्षा मंत्रालय ने 'एआई इन डिफेंस' (AiDef) पहल के तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में एआई और डेटा एनालिटिक्स के समावेश को तेजी से लागू किया है। भारत स्वदेशी तकनीक और स्टार्ट-अप्स के माध्यम से अपनी सीमाओं की सुरक्षा को स्मार्ट और आधुनिक बना रहा है।
साथ ही, भारत एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की वकालत करता है। भारत का रुख है कि एआई जैसी संवेदनशील तकनीकों का इस्तेमाल वैश्विक शांति और मानवता के हित में होना चाहिए, न कि विनाशकारी हथियारों की अनियंत्रित होड़ के लिए।
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