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एआई और सेमीकंडक्टर तकरार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक आपूर्ति पर कुछ चुनिंदा महाशक्तियों और टेक दिग्गजों के बढ़ते वर्चस्व को लेकर चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
13 Oct 2026
Solar farm during sunset

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक आपूर्ति पर कुछ चुनिंदा महाशक्तियों और टेक दिग्गजों के बढ़ते वर्चस्व को लेकर चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी प्रशासन ने एआई सुरक्षा और सुपर-इंटेलिजेंस मानकों को नियंत्रित करने के लिए अपनी नीति में बड़े फेरबदल किए हैं। वहीं, एआई मॉडल्स के अनियंत्रित प्रसार और डिवाइसों पर कब्जे के खतरों को लेकर वैश्विक टेक कम्युनिटी ने गंभीर चेतावनी जारी की है।

​अमरीका द्वारा चीन पर लगाए गए सख्त टेक-प्रतिबंधों (Tech Sanctions) के कारण दोनों महाशक्तियों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स (दुर्लभ खनिजों) और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को लेकर तनातनी जारी है। यूएन संस्थाओं (UNCTAD) के अनुसार, एआई और चिप्स से जुड़ी तकनीक कुछ ही हाथों में केंद्रित होने से वित्तीय स्थिरता और अन्य देशों के डिजिटल विकास को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

​इस टेक-वॉर के चलते डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। विभिन्न देशों में एआई के जरिए चलाए जा रहे दुष्प्रचार और बुनियादी ढांचे (जैसे साइबर हमलों से पावर ग्रिड या कोल्ड स्टोरेज का प्रभावित होना) पर हमलों की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं।

​आगामी जी-20 और वैश्विक टेक सम्मेलनों में एआई गवर्नेंस पर एक सर्वसम्मत ढांचा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन अमरीका और उसके प्रतिस्पर्धियों के बीच कड़े तकनीकी मतभेद इस दिशा में किसी भी वैश्विक सहमति तक पहुंचने में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

​भारत के लिए यह टेक-वॉर दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ जहां अमरीका-चीन तकनीकी तनातनी के कारण 'चीन+1' रणनीति के तहत भारत में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' और टेक असेंबलिंग को भारी गति मिली है, वहीं दूसरी तरफ क्रिटिकल मिनरल्स और उच्च-स्तरीय चिप्स के लिए विदेशी निर्भरता बनी हुई है।

​भारत के पास विशाल डेटा बेस और कुशल युवा तकनीकी प्रतिभा है, जिससे भारत खुद को एआई सुरक्षा और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत का प्रयास है कि तकनीकी प्रगति केवल कुछ महाशक्तियों का एकाधिकार न बने, बल्कि विकासशील देशों के लिए भी सुलभ रहे।

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