संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अपनी एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी रिपोर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आगामी 'अल नीनो' (El Niño) चक्र इतिहास के सबसे भयानक रूपों में सामने आ सकता है। इस भीषण जलवायू परिवर्तन के कारण दुनिया भर के 34 करोड़ से अधिक बच्चों का स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन भारी खतरे में पड़ गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नए अल नीनो चक्र के दौरान दुनिया के विभिन्न हिस्सों में या तो रिकॉर्ड तोड़ सूखा पड़ेगा या फिर विनाशकारी बाढ़ और चक्रवाती तूफान आएंगे। जलवायु परिवर्तन के इस दुष्प्रभाव से बच्चों में कुपोषण, खतरनाक बीमारियां और पीने के साफ पानी का भारी संकट पैदा होने की आशंका जताई गई है, जिससे पूरी दुनिया सहमी हुई है।
UNICEF ने वैश्विक सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे समय रहते आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करें, अन्यथा आने वाले महीनों में लाखों मासूमों की जान बचाना असंभव हो जाएगा। स्कूलों के बंद होने और स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने से एक पूरी पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है।
विकासशील देशों के ग्रामीण इलाकों में इसका सबसे बुरा असर देखने को मिलेगा, जहाँ पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। खाद्यान्न उत्पादन ठप होने से दुनिया भर में भुखमरी और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल नीनो की यह चेतावनी एक बड़ी परीक्षा का समय है। भारत की अर्थव्यवस्था और मानसून का चोली-साथ का दामन है। यदि अल नीनो के कारण देश में मानसूनी बारिश प्रभावित होती है, तो खरीफ की फसलें बर्बाद हो सकती हैं और देश में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छूने लग सकते हैं।
हालांकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) और सरकार इस तरह की किसी भी आपदा से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और खाद्यान्न के बफर स्टॉक का उपयोग करने की तैयारी में जुटे हैं। इसके बावजूद, ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और किसानों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली को अत्यधिक सतर्क रहना होगा।
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