स्ट्रैप्टोकोकस न्यूमोनिया (Streptococcus pneumoniae) जीवाणु हमारी नाक और गले में बिना कोई नुकसान पहुँचाए रहता है, लेकिन वायरल बुखार के बाद जब रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर पड़ती है, तो यह फेफड़ों, मस्तिष्क और रक्त पर हमला कर देता है - जिससे निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और सेप्सिस जैसी बीमारियाँ होती हैं। ये बीमारियां टीकों द्वारा रोकी जा सकती हैं, फिर भी हमारे वर्तमान टीके इनके केवल एक छोटे से हिस्से से ही बचाव करते हैं।
इस जीवाणु के कम से कम 100 सेरोटाइप (प्रकार) हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अनूठा शर्करा युक्त कैप्सूल पॉलीसैकेराइड होता है। मौजूदा टीके - जैसे न्यूमोवैक्स 23 (Pneumovax 23) केवल पॉलीसैकेराइड का मिश्रण है जो कमजोर और कम समय तक असरदार रहता है; वहीं प्रेवनार PCV10 और PCV13 मज़बूत इम्युनिटी के लिए पॉलीसैकेराइड को वाहक प्रोटीन से जोड़ते हैं - लेकिन ये केवल कुछ सेरोटाइप को ही निशाना बनाते हैं। जब ये टीके उन विशिष्ट सेरोटाइप को खत्म करते हैं, तो गैर-टीका सेरोटाइप उनकी जगह ले लेते हैं, जिससे टीके बेअसर हो जाते हैं। कुछ जीवाणु एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) भी विकसित कर लेते हैं, जिससे दोहरा खतरा पैदा हो जाता है।
वैज्ञानिक अब एक ऐसा सार्वभौमिक टीका बनाना चाहते हैं जो सभी सेरोटाइप को निशाना बनाए और इन अवांछित परिणामों को रोके। एक ब्रिटिश टीम ने 'रिवर्स वैक्सिनोलॉजी' (रोगाणु के बजाय जीनोम से शुरुआत) का उपयोग करके पहला कदम उठाया है। एस. न्यूमोनिया में 2,000 से अधिक जीन होते हैं, जिनमें से 1,300 जीन 20,000 से अधिक नमूनों में समान (कॉमन) हैं। उन्होंने कंप्यूटेशनल पद्धतियों से ऐसे प्रोटीनों की पहचान की जो सतह पर स्थित हों, मानव प्रोटीनों से भिन्न हों, शरीर के ऊतकों पर हमला न करें और लंबी अवधि के लिए मजबूत प्रतिरोधक क्षमता देने में सक्षम हों।
उन्होंने जिंक मेटालोप्रोटीज़ B (Z), न्यूमोकोकल एडहेरेंस फैक्टर A (P), और एक YOP-जैसा प्रोटीन (Y) शॉर्टलिस्ट किया। प्रयोगशाला में प्रोटीन Z, P, Y तैयार किए गए, उन्हें प्रायोगिक वैक्सीन ZPY में मिलाया गया, और दो बूस्टर - सिंथेटिक CpG DNA और शर्करा युक्त चिटोसन (chitosan) जोड़े गए, जिससे 'ZPY-CpG-Ch' फॉर्मूलेशन तैयार हुआ।
लैब में चूहों पर किए गए परीक्षण के परिणाम आशाजनक रहे। ZPY-CpG-Ch ने प्रभावी एंटीबॉडी बनाई और घातक सेरोटाइप 1 से 80-100% चूहों की रक्षा की, जो PCV13 के समान ही असरदार था। इन एंटीबॉडीज ने टेस्ट ट्यूब में बैक्टीरिया को मार दिया और जब बिना टीके वाले चूहों में डाला गया तो उनकी भी रक्षा की। इसने गैर-टीका सेरोटाइप 11A और 33F की घातक खुराक के खिलाफ पूर्ण सुरक्षा प्रदान की, और सेरोटाइप 8 के खिलाफ 50% सुरक्षा दी।
चेतावनी/सीमा: टीकाकृत चूहों के ऊपरी श्वसन पथ में अभी भी बैक्टीरिया मौजूद थे और वे बिना टीका लगे चूहों में संक्रमण फैला सकते थे। इसके अलावा, इसका परीक्षण केवल 4 सेरोटाइप पर ही किया गया था।
फिर भी, यह एक महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर एक पहला कदम है - एक सार्वभौमिक न्यूमोकोकल टीका जो सेरोटाइप प्रतिस्थापन और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के दुचक्र को समाप्त कर सके।