तेलंगाना के एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पर देर रात घटे एक दर्दनाक और भयावह हादसे ने सड़क सुरक्षा और वाहनों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार से जा रहा एक मालवाहक कैंटर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे हाई-टेंशन बिजली के खंभे (High-Tension Power Pole) से बेहद तेजी से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बिजली का खंभा टूटकर कैंटर पर गिर पड़ा, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और वाहन की ईंधन टंकी में पलक झपकते ही भीषण आग लग गई। इस अचानक हुए हादसे ने कैंटर चालक को संभलने का कोई मौका नहीं दिया।
दुर्घटना के वक्त कैंटर में लगभग 200 मवेशी (बकरियां) भी लदे हुए थे, जिन्हें पास की मंडी में ले जाया जा रहा था। गाड़ी में आग इतनी तेजी से फैली कि चालक के साथ-साथ सभी मवेशी भी कैंटर के भीतर ही जिंदा जल गए। स्थानीय ग्रामीणों ने आग की लपटें देखकर तुरंत पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ जब तक मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पातीं, तब तक वाहन और उसमें मौजूद सब कुछ पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था। इस खौफनाक मंजर ने क्षेत्र के लोगों को दहला कर रख दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा।
पुलिस द्वारा की गई प्राथमिक जांच से पता चलता है कि यह हादसा चालक को देर रात अचानक झपकी आ जाने या अत्यधिक तेज रफ्तार के कारण हुआ हो सकता है। देर रात तक वाहन चलाने वाले चालकों की थकान और राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्याप्त रोशनी व सुरक्षा बैरियरों की कमी ऐसी घटनाओं के मुख्य कारण बनते हैं। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन के अवशेषों को हटाकर राजमार्ग को साफ कराया और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही, बिजली विभाग की टीम को क्षतिग्रस्त खंभे और बिखरे हुए हाई-टेंशन तारों को ठीक करने के लिए लगाया गया।
यह दुर्घटना इस बात का दर्दनाक उदाहरण है कि कैसे एक पल की लापरवाही या थकान भारी तबाही ला सकती है। सड़क परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक वाहनों के चालकों के लिए काम के घंटों की सीमा तय की जानी चाहिए और राजमार्गों पर 'एंटी-स्लीप' सुरक्षा प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, मवेशियों को अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंस कर ले जाने वाले वाहनों पर भी सख्त निगरानी की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे जान-माल के नुकसान और भयानक अग्निकांडों से बचा जा सके।