Flash Cult Current
विज्ञान

AI और डीपफेक तकनीक पर सरकार का बड़ा हंटर: अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के लगातार बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। टेक कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एआई टूल डेवलपर्स के लिए नए कड़े दिशानिर्देशों की घोषणा की गई है।

कल्ट करंट डेस्क
Cult Current
11 Sep 2026
Solar farm during sunset

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के लगातार बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। टेक कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एआई टूल डेवलपर्स के लिए नए कड़े दिशानिर्देशों की घोषणा की गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी छवि, आवाज या चेहरा बदलकर (Deepfake) सामग्री बनाना और उसे इंटरनेट पर फैलाना अब एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। इस फैसले से टेक जगत और सोशल मीडिया कंपनियों में भारी हलचल मच गई है।

नए नियमों के अनुसार, सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने सिस्टम और एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने होंगे जिससे डीपफेक और आपत्तिजनक एआई कंटेंट को पोस्ट होते ही खुद ब खुद (Auto-detect) पहचानकर हटा दिया जाए। यदि कोई उपयोगकर्ता ऐसी सामग्री की रिपोर्ट करता है, तो प्लेटफॉर्म को 24 घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनी की 'सेफ हार्बर' (Safe Harbor) कानूनी सुरक्षा वापस ले ली जाएगी, जिससे कंपनी पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज कराया जा सके।

 इस अपराध के लिए भारी जुर्माने और जेल की सख्त सजा का प्रावधान किया है। डीपफेक बनाने, उसे एडिट करने या उसे बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों को लाखों रुपये का जुर्माना भरने के साथ-साथ कई सालों की जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। इसके अलावा, नियम तोड़ने वाली टेक कंपनियों पर उनकी वैश्विक कमाई के आधार पर भारी पेनल्टी लगाने का नियम बनाया गया है। टेक दिग्गजों को अपने प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से 'AI-जनरेटेड' वाटरमार्क या लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि आम लोग असली और नकली कंटेंट में पहचान कर सकें।

पिछले कुछ महीनों में कई मशहूर हस्तियों, खिलाड़ियों, राजनेताओं और आम नागरिकों के विकृत डीपफेक वीडियो और साइबर ठगी के मामले सामने आए थे। इसके कारण न केवल लोगों की व्यक्तिगत निजता पर हमला हुआ, बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई। इसी बड़े खतरे को भांपते हुए डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को यह सख्त कानून लागू करना पड़ा है।

तकनीक की दुनिया में सरकार का यह कदम एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यद्यपि एआई के क्षेत्र में नवाचार (Innovation) आवश्यक है, लेकिन बिना किसी जवाबदेही के यह समाज और लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन रहा था। सरकार के इन नए नियमों से एआई का इस्तेमाल अधिक पारदर्शी, नैतिक और सुरक्षित होने की पूरी उम्मीद है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टेक कंपनियां इन कड़े नियमों को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू करती हैं।