एक बड़े मेट्रो शहर के अति-प्रतिष्ठित और नामी अस्पताल में उस समय चीख-पुकार मच गई जब उसकी बहुमंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल पर स्थित इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया और चारों तरफ जहरीले धुएं का काला गुबार फैल गया। जिस वक्त यह हादसा हुआ, ICU वार्ड में कई गंभीर मरीज वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर मौजूद थे। अस्पताल में लगे फायर अलार्म बजते ही मरीजों के परिजनों और मेडिकल स्टाफ के बीच भगदड़ और दहशत का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की एक दर्जन से अधिक गाड़ियां और त्वरित प्रतिक्रिया बल (QRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। संकरे रास्तों और धुएं के घने गुबार के कारण शुरुआत में बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दमकलकर्मियों और अस्पताल के बहादुर कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कांच की खिड़कियों और शीशों को तोड़कर अंदर प्रवेश किया। धुएं से घुट रहे मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर लादकर तुरंत बाहर निकाला गया और पास के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।
दमकल विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण ICU में लगे किसी हाई-वोल्टेज मेडिकल उपकरण या एयर कंडीशनिंग यूनिट में हुआ शार्ट सर्किट माना जा रहा है। ऑक्सीजन की मौजूदगी के कारण आग बहुत तेजी से फैली, जिससे वार्ड में रखी महंगी मेडिकल मशीनें, बेड और अन्य उपकरण जलकर खाक हो गए। गनीमत यह रही कि दमकलकर्मियों और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी के चलते समय रहते सभी मरीजों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा और भयावह जानलेवा हादसा होने से टल गया।
इस दर्दनाक हादसे ने देश के बड़े-बड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन सुरक्षा (Fire Safety) के इंतज़ामों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार और स्थानीय नगर निगम ने मामले का संज्ञान लेते हुए घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच समिति इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या अस्पताल के पास वैध एनओसी (NOC) थी और क्या हादसे के वक्त ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर व स्मोक डिटेक्टर सही तरीके से काम कर रहे थे या नहीं।
यह घटना उन सभी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो रोजाना हजारों लोगों का इलाज करते हैं। केवल अत्याधुनिक इलाज की सुविधाएं होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपातकालीन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना भी उतना ही अनिवार्य है। सरकार को चाहिए कि वह सभी अस्पतालों का नियमित फायर ऑडिट कराए ताकि भविष्य में किसी भी मरीज या उनके तीमारदारों को अस्पताल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर इस तरह के खौफनाक मंजर का सामना न करना पड़े।