देश के कई राज्यों में मौसम के अचानक बदले मिज़ाज ने भयंकर तबाही मचाई है। बेमौसम हुई मूसलाधार बारिश और रिकॉर्ड तोड़ ओलावृष्टि ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। आसमान में छाए घने काले बादलों और गरज-चमक के साथ हुई इस भारी बारिश ने शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हड़कंप मचा दिया है, जिससे सड़कों से लेकर निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का सबसे घातक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसलों को ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी कुछ ही मिनटों की ओलावृष्टि में बर्बाद हो गई। फलदार बागों और सब्जियों की खेती को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसान संगठनों ने राज्य सरकारों से तुरंत सर्वे करवाकर मुआवजे की मांग की है, क्योंकि इस प्राकृतिक आपदा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है।
शहरों की स्थिति भी कम खौफनाक नहीं है। मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख सड़कों पर जलभराव हो गया है, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है। बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ने से कई इलाकों में घंटों से बिजली आपूर्ति ठप है। कई स्थानों पर अंडरपास पानी में डूब गए हैं, जिससे गाड़ियों के बहने और लोगों के फंसने की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमों (SDRF) को स्थिति पर काबू पाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए मैदान में उतरना पड़ा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अचानक हुए मौसमी बदलाव के पीछे मजबूत 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं का आपस में टकराना है। जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में आ रहे ऐसे तीव्र उतार-चढ़ाव अब बार-बार देखने को मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 24 से 48 घंटों तक स्थिति ऐसी ही बनी रह सकती है, जिसके दौरान तेज हवाओं के साथ और बारिश होने की संभावना जताई गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें। बिजली के खंभों, जर्जर इमारतों और बड़े पेड़ों के नीचे आश्रय न लेने की सख्त हिदायत दी गई है। स्थानीय प्रशासन जल निकासी और राहत कार्यों में जुटा हुआ है। यह प्राकृतिक आपदा एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि जलवायु में हो रहे अनियंत्रित बदलावों के सामने हमारी बुनियादी संरचनाएं कितनी संवेदनशील हैं और हमें भविष्य के लिए आपदा प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।