। यह हादसा उस समय हुआ जब नौका एक द्वीप से दूसरे द्वीप की ओर नियमित यात्रा पर थी। प्रत्यक्षदर्शियों और बचे हुए यात्रियों के अनुसार, आग सबसे पहले नौका के निचले हिस्से यानी इंजन रूम से शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी नौका को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे यात्रियों के बीच भारी भगदड़ मच गई।
इंजन रूम में हुए विस्फोट के बाद पूरी नौका में घना काला धुआं भर गया, जिससे यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई होने लगी। जीवन रक्षक जैकेटों (Life Jackets) की कमी और अफरा-तफरी के माहौल के कारण कई यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए जलती हुई नौका से सीधे गहरे समंदर में छलांग लगा दी। घटना की जानकारी मिलते ही फिलीपींस तटरक्षक बल (Coast Guard), नौसेना और आसपास मौजूद स्थानीय मछुआरों ने तुरंत एक व्यापक संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दल ने विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए दर्जनों यात्रियों को समुद्र की लहरों के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन इस दुखद हादसे में कई लोगों की जलने और डूबने से मौत हो गई।
प्रारंभिक जांच रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि नौका के इंजन में यांत्रिक खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी होगी, जिसने ईंधन टैंक को अपनी चपेट में ले लिया। इसके अतिरिक्त, इस बात की भी गहन जांच की जा रही है कि क्या नौका पर तय सीमा से अधिक यात्री सवार थे और क्या उसमें सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन किया गया था। फिलीपींस के समुद्री परिवहन विभाग ने नौका मालिक और संचालन कंपनी के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
इस भयानक त्रासदी ने द्वीप-राष्ट्रों में समुद्री यातायात सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। फिलीपींस जैसे देशों में, जहाँ द्वीप समूह के बीच आवाजाही के लिए नौकाएं ही परिवहन का मुख्य साधन हैं, सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती है। सरकार ने अब सभी व्यावसायिक नौकाओं के अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट का निर्देश दिया है। लापता यात्रियों की तलाश के लिए तटरक्षक बल के गोताखोर और हेलीकॉप्टर अभी भी प्रभावित समुद्री क्षेत्र में खोज अभियान चला रहे हैं, जबकि घायलों का इलाज नजदीकी तटीय अस्पतालों में किया जा रहा है।