भारत की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र के रूप में उभरकर सामने आई है। आगामी BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए शहर को पूरी तरह से सजाया और सुरक्षित किया गया है। इस सम्मेलन का आयोजन वैश्विक राजनीति, आर्थिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है। सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील के राष्ट्रपति और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेता भारत पहुँच रहे हैं। वैश्विक पटल पर जारी कूटनीतिक तनावों, व्यापारिक प्रतिबंधों और सीमा विवादों के बीच इस सम्मेलन की सफलता भारत की मध्यस्थता क्षमता पर काफी हद तक निर्भर करती है।
सम्मेलन की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF), और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के 30,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। शिखर सम्मेलन के मुख्य स्थल, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के ठहरने वाले VVIP होटलों और उनके आवागमन के मार्गों को पूरी तरह से सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। किसी भी अप्रिय घटना या तकनीकी खतरे से निपटने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र लागू किया गया है। हवाई क्षेत्र में ड्रोन रोधी प्रणाली (Anti-Drone System) सक्रिय की गई है, और वायु सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों से वास्तविक समय में निगरानी रखी जा रही है।
व्यापार और स्थानीय नागरिकों की सुविधा के लिए दिल्ली यातायात पुलिस ने एक व्यापक ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। लुटियंस दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में सामान्य वाहनों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से दिल्ली मेट्रो, को अतिरिक्त फेरे लगाने और VVIP मार्गों के पास के स्टेशनों पर सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं। आपातकालीन सेवाओं, जैसे एम्बुलेंस और अग्निशमन गाड़ियों के लिए विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाए गए हैं ताकि आम जनता को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े। सरकार ने निजी दफ्तरों को वर्क फ्रॉम होम देने और कुछ क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने की सिफारिश भी की है।
कूटनीतिक दृष्टिकोण से यह सम्मेलन बहुपक्षीय व्यापार, राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान प्रणाली और डी-डॉलरकरण (De-dollarization) के मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। इसके अलावा, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करना और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार की मांग करना भी एजेंडे में प्रमुख है। भारत इस मंच का उपयोग न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए करना चाहता है, बल्कि चीन के साथ जारी सीमा वार्ता और रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद का माहौल बनाने के प्रयास में भी है। यह शिखर सम्मेलन भारत की "वसुधैव कुटुंबकम" की नीति और वैश्विक पटल पर एक संतुलित मध्यस्थ के रूप में उसकी स्थिति को मजबूती से रेखांकित करता है।