देश की साइबर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। विदेशों से संचालित होने वाले एक बेहद शातिर और खौफनाक 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने इसके मुख्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह देश भर के सीधे-साधे आम नागरिकों, बुजुर्गों और पेशेवरों को अपना निशाना बनाकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका था। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध की काली दुनिया में हड़कंप मच गया है और ठगी के एक नए व खतरनाक पैटर्न का खुलासा हुआ है।
इस गिरोह की कार्यशैली (Modus Operandi) बेहद खौफनाक और योजनाबद्ध थी। साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) या नारकोटिक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ितों को वीडियो कॉल करते थे। वे फर्जी पुलिस स्टेशन का सेटअप तैयार करके पीड़ितों पर यह झूठा आरोप लगाते थे कि उनके नाम पर आए पार्सल में ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या गैर-कानूनी सामग्री पाई गई है। इसके बाद आरोपी पीड़ित को कानून का डर दिखाकर घंटों वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' रखते थे और केस रफा-दफा करने के नाम पर उनसे बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लेते थे।
विशेष साइबर टीम ने अत्याधुनिक फॉरेंसिक सर्विलांस, IP एड्रेस ट्रैकिंग और बैंक खातों की गहन जांच के जरिए इस सिंडिकेट के तार तलाशे। पुलिस ने जब मास्टरमाइंड के ठिकाने पर रेड मारी, तो वहां से सैकड़ों फर्जी सिम कार्ड, दर्जनों महंगे लैपटॉप, पासबुक, फर्जी सरकारी मुहरें और कई एनक्रिप्टेड मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी का यह पैसा क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशों में भेजा जा रहा था ताकि इसे आसानी से ट्रैक न किया जा सके।
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई के बाद आम जनता के लिए एक विशेष चेतावनी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारत का कानून या कोई भी जांच एजेंसी किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तार या 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं कर सकती। कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी किसी नागरिक से फोन पर पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करतीं। यदि किसी व्यक्ति के पास इस तरह का कोई फर्जी या डरावना कॉल आता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में सूचना देनी चाहिए।
मास्टरमाइंड की यह गिरफ्तारी देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि, यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि डिजिटल युग में सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना भी उतना ही जरूरी है। सरकार और पुलिस प्रशासन अब इस गिरोह के बाकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों के पैसे वापस कराने की दिशा में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।