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दिल्ली डिक्लेरेशन 2026: ब्रिक्स का ऐतिहासिक कदम, नई आर्थिक नीतियां और वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव

नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के समापन पर सर्वसम्मति से अपनाए गए 'दिल्ली डिक्लेरेशन' (Delhi Declaration) ने वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र को एक नई दिशा देने का काम किया है। मेजबान देश के रूप में भारत की कूटनीतिक कुशलता

कल्ट करंट डेस्क
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13 Sep 2026
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नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के समापन पर सर्वसम्मति से अपनाए गए 'दिल्ली डिक्लेरेशन' (Delhi Declaration) ने वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र को एक नई दिशा देने का काम किया है। मेजबान देश के रूप में भारत की कूटनीतिक कुशलता के चलते सदस्य देश वैश्विक आर्थिक संकट, आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण (Supply Chain Diversification), मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु वित्त (Climate Finance) जैसे अत्यंत जटिल विषयों पर एक साझा दृष्टिकोण और सर्वसम्मत घोषणापत्र तैयार करने में सफल रहे हैं।

दिल्ली डिक्लेरेशन का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय प्रणालियों का पुनर्गठन है। घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया है कि ब्रिक्स देश आपसी व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) के उपयोग को बढ़ावा देंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को अधिक समावेशी और बहुध्रुवीय बनाया जा सके। इसके अलावा, सदस्य देशों ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारत के सफल 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) मॉडल—जैसे यूपीआई और डिजिटल पहचान प्रणालियों—को अपनाने और साझा करने में गहरी रुचि दिखाई है।

मध्य पूर्व और अन्य वैश्विक संघर्ष क्षेत्रों की स्थिति पर घोषणापत्र में शांतिपूर्ण संवाद और कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया गया है। ब्रिक्स देशों ने किसी भी प्रकार के एकतरफा प्रतिबंधों (Unilateral Sanctions) का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विकासशील देशों के खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के हितों की रक्षा करना इस घोषणापत्र की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा गया है, ताकि युद्ध या संघर्षों का खामियाजा गरीब और मध्यम आय वाले देशों को न भुगतना पड़े।

भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन कूटनीतिक जीत का एक बड़ा उदाहरण है। भारत ने मंच का कुशलता से संचालन करते हुए यह सुनिश्चित किया कि ब्रिक्स किसी एक गुट का विरोध करने वाला संगठन न बनकर वैश्विक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजने वाला मंच बने। भारत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) की भावना के साथ ग्लोबल साउथ के विकासशील और विकसित देशों के बीच एक मजबूत पुल की भूमिका निभाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख और नेतृत्व क्षमता और अधिक मजबूत हुई है।

संक्षेप में, दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 केवल एक राजनीतिक घोषणापत्र नहीं है, बल्कि यह एक नई वैश्विक व्यवस्था का खाका है। यह डिक्लेरेशन आने वाले दशकों में यह तय करेगा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कैसे होगा, वैश्विक वित्तीय संस्थाओं का पुनर्गठन किस दिशा में जाएगा और दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन जैसी साझा चुनौतियों से कैसे निपटेंगे। भारत की मेजबानी में हुआ यह सम्मेलन वैश्विक शासन (Global Governance) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।