भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रमुख एफएमसीजी (FMCG) कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी व अधिनिर्णय (Adjudication) की प्रक्रिया शुरू की है। यह कार्रवाई कंपनी के बच्चों के पोषण से जुड़े उत्पादों (Infant Nutrition Products) जैसे NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 पर किए जा रहे भ्रामक विज्ञापनों और गुणवत्ता से जुड़े मानकों के उल्लंघन के आरोपों में की गई है।
खाद्य नियामक FSSAI ने जांच में पाया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और विज्ञापनों में इन उत्पादों में "5 HMOs" और "प्रोटीन के आसानी से पचने योग्य होने" जैसे दावे किए जा रहे थे। FSSAI के नियमों के अनुसार नवजात शिशुओं के आहार संबंधी उत्पादों पर बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रकार के भ्रामक दावे करना 'शिशु पोषण विनियम 2020' के तहत प्रतिबंधित है। इसके अलावा लैब टेस्ट में एक फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटीन का स्तर निर्धारित मानकों से कम पाया गया।
नियामक ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण मानकों से जुड़ी किसी भी लापरवाही या भ्रामक मार्केटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह कदम बाजार में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के अभियान का हिस्सा है।
दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उनके सभी उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं और उनके उत्पादों पर दिए गए विवरण वैज्ञानिक प्रमाणों और विशेषज्ञों द्वारा अनुमोदित हैं। कंपनी का कहना है कि वे इस मामले में प्राधिकरण के समक्ष अपना विस्तृत जवाब और स्पष्टीकरण दाखिल कर रहे हैं।
यह कानूनी कार्रवाई बच्चों के पैकेज्ड फूड की गुणवत्ता और कंपनियों की मार्केटिंग रणनीतियों पर एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दे रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने FSSAI के इस कदम का स्वागत करते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे विज्ञापन दावों के बजाय बाल रोग विशेषज्ञों की सलाह पर ही शिशु आहार का चयन करें।