नेपाल में मानसूनी बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है। देश के 40 से अधिक जिलों में नदियां उफान पर हैं और काठमांडू घाटी समेत कई प्रमुख शहर जलमग्न हो गए हैं। नेपाल गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा से मरने वालों की संख्या 1,400 को पार कर गई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। काठमांडू को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले मुख्य राजमार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। नेपाल सेना, सशस्त्र प्रहरी बल और पुलिस के हजारों जवानों को दुर्गम इलाकों में तैनात किया गया है। हेलीकॉप्टरों और रबर बोट्स के जरिए छतों और ऊंचे स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम के कारण कई पहाड़ी इलाकों में हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आपदा के कारण देश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह तबाह हो गया है। कई पुल बह गए हैं, बिजली और संचार सेवाएं ठप हो चुकी हैं, और पीने के पानी की गंभीर किल्लत पैदा हो गई है। राहत शिविरों में शरण लिए लाखों लोगों के बीच संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि बारिश का दौर जारी रहता है, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने नेपाल की इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मदद के हाथ बढ़ाए हैं। भारत ने नेपाल को पड़ोसी प्रथम नीति के तहत तुरंत राहत सामग्री, दवाएं और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमें भेजने का प्रस्ताव दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने भी भोजन, तिरपाल और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सामग्री का वितरण शुरू कर दिया है ताकि प्रभावित आबादी को तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इस विपदा की घड़ी में धैर्य और एकजुटता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने घोषणा की है कि सरकार मृतकों के परिवारों को मुआवजा प्रदान करेगी और तबाह हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए विशेष फंड गठित किया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि अनियोजित निर्माण और जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल में इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं की बारंबारता और तीव्रता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।